

15 फीट ऊंचे गेट को JCB से हटाने के बाद बढ़ा विवाद।
NMDC ने बताया टाउनशिप की सुरक्षा के लिए जरूरी।
जनप्रतिनिधियों ने उठाए आम रास्ते पर कब्जे के सवाल।
SDM की बैठक भी नहीं निकाल सकी स्थायी समाधान।
Chhattisgarh NMDC Gate Controversy: दंतेवाड़ा जिले के बड़े बचेली में एक गेट ने NMDC प्रबंधन और नगर पालिका के बीच ऐसा विवाद खड़ा कर दिया है कि मामला अब सीधे टकराव तक पहुंच गया है। DAV स्कूल के पास बनाए जा रहे करीब 15 फीट ऊंचे गेट को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल निर्माण और अनुमति का मामला नहीं रह गया, बल्कि टाउनशिप की सुरक्षा बनाम आम नागरिकों की आवाजाही का सवाल बन गया है। नगर पालिका पहले ही JCB चलाकर निर्माणाधीन गेट हटवा चुकी है। अब विधायक चैतराम अटामी की खुली चेतावनी ने इस विवाद को और गरमा दिया है।
मामले की जानकारी मिलने पर विधायक चैतराम अटामी मौके पर पहुंचे और NMDC प्रबंधन के अधिकारियों के सामने कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने साफ कहा कि नगर पालिका की अनुमति और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहमति के बिना इस तरह का निर्माण स्वीकार नहीं किया जाएगा। विधायक ने दो टूक कहा कि NMDC प्रबंधन गेट खुद हटा ले, अन्यथा वे आम जनता के साथ मिलकर इसे उखाड़ फेंकेंगे।
विधायक ने कहा कि नगर के अधिकारों और स्थानीय जनभावनाओं को नजरअंदाज कर कोई निर्णय नहीं थोपा जाना चाहिए। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नगर पालिका, समन्वय समिति और NMDC प्रबंधन की संयुक्त बैठक बुलाकर सर्वसम्मति से समाधान निकालने का सुझाव भी दिया।
दरअसल, NMDC बचेली कॉम्प्लेक्स में DAV पब्लिक स्कूल के समीप इंटक भवन और स्कूल की दीवार के बीच से गुजरने वाले रास्ते पर गेट का निर्माण कराया जा रहा था। वार्ड क्रमांक 16 और 17 के नागरिकों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह रास्ता अस्पताल, रेलवे स्टेशन, बाजार, डाकघर और स्कूल सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों तक पहुंचने का माध्यम है। यहां गेट लगने से आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
इसी विरोध के बीच 27 अक्टूबर को सुबह करीब 11:15 बजे नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों ने JCB की मदद से निर्माणाधीन गेट हटवा दिया। इस कार्रवाई के बाद NMDC प्रबंधन ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
इस पूरे विवाद पर NMDC प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि गेट लगाने का उद्देश्य टाउनशिप की सुरक्षा बढ़ाना, कंपनी की सरकारी एवं निजी संपत्तियों, मशीनरी और आधारभूत संरचनाओं को सुरक्षित रखना तथा रात के समय अनधिकृत आवाजाही को नियंत्रित करना है।
प्रबंधन के मुताबिक प्रस्तावित व्यवस्था में रात के समय गेट बंद रखने की योजना थी, लेकिन टाउनशिप के निवासियों और अधिकृत लोगों की आवाजाही बाधित नहीं होनी थी। इसमें मरीजों, स्कूली बच्चों, अभिभावकों और रेल यात्रियों के लिए भी आवागमन सुगम रखने की व्यवस्था प्रस्तावित थी।
NMDC ने गेट को JCB से हटाए जाने पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि इससे कंपनी की संपत्ति को नुकसान पहुंचा और सुरक्षा संबंधी कार्य प्रभावित हुए। प्रबंधन का कहना है कि यदि प्रस्तावित सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी पक्ष को आपत्ति थी तो उसे बातचीत के माध्यम से समाधान के लिए प्रबंधन के समक्ष रखना चाहिए था। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह स्थानीय प्रशासन और अन्य हितधारकों के साथ रचनात्मक समन्वय बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन अपनी संपत्ति, मशीनरी और टाउनशिप के निवासियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक एवं विधिसम्मत उपाय जारी रखेगी।
विवाद बढ़ने के बाद 28 अक्टूबर को SDM कार्यालय में NMDC प्रबंधन और नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई थी। इसके बाद दोनों पक्षों के अधिकारी मौके पर भी पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। SDM राजीव कुजूर ने दोनों पक्षों से आपसी संवाद और समन्वय के जरिए समाधान निकालने की अपील की, ताकि टाउनशिप की सुरक्षा के साथ आम नागरिकों की आवाजाही भी प्रभावित न हो।
बचेली में इस विवाद ने दो अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर ऐसे रास्तों पर गेट लगाए जा सकते हैं, जिनका इस्तेमाल आम नागरिक करते हैं? और क्या स्थानीय निकाय की अनुमति एवं जनप्रतिनिधियों की सहमति के बिना ऐसे निर्माण कराए जा सकते हैं?
एक तरफ NMDC अपनी संपत्ति और टाउनशिप की सुरक्षा को जरूरी बता रहा है, तो दूसरी तरफ नगर पालिका और स्थानीय नागरिक निर्बाध आवागमन को अपना अधिकार बता रहे हैं। अब विधायक की चेतावनी के बाद देखना होगा कि NMDC प्रबंधन अपने प्रस्ताव पर कायम रहता है या संयुक्त बैठक में कोई ऐसा रास्ता निकलता है, जिससे कंपनी की सुरक्षा और आम जनता की सुविधा दोनों सुरक्षित रह सकें।