एडिशनल SP अनामिका जैन को बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ी राहत, विभागीय जांच पर लगा ब्रेक!

Bilaspur High Court: जस्टिस बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए यह राहत दी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने पैरवी की।
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बिलासपुर हाईकोर्ट(सोर्स - सोशल मीडिया)
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Highlights

  • जस्टिस बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने की मामले की सुनवाई।

  • हाईकोर्ट ने विभागीय जांच पर स्थगन लगा दिया।

  • अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने की पैरवी।

  • रायपुर में PHQ में एडीशनल एसपी के पद पर पदस्थ।

Raipur Additional SP Anamika Jain: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एडीशनल एसपी) अनामिका जैन को बड़ी राहत दी है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच पर स्थगन (स्टे) लगा दिया है। मामला एक आपराधिक प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें विभागीय जांच और आपराधिक मुकदमे में आरोप के साथ गवाह भी समान बताए गए हैं। जस्टिस बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए यह राहत दी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू ने पैरवी की।

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जानिए क्या है पूरा मामला?

सेक्टर-29, नवा रायपुर निवासी अनामिका जैन वर्तमान में पुलिस मुख्यालय (PHQ), रायपुर में एडीशनल एसपी के पद पर पदस्थ हैं। वर्ष 2020 में दुर्ग जिले में उनकी पदस्थापना के दौरान भिलाई निवासी के. व्ही. अरुण की शिकायत पर उनके खिलाफ पुरानी भिलाई थाने में आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस द्वारा चालान पेश किए जाने के बाद छत्तीसगढ़ गृह विभाग ने अनामिका जैन को आरोप पत्र जारी कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर विभागीय जांच की कार्रवाई को चुनौती दी।

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हाईकोर्ट में क्या दी गई दलील?

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि आपराधिक मामले और विभागीय जांच में आरोप एक जैसे हैं। इतना ही नहीं, दोनों मामलों में गवाह भी समान हैं। ऐसे में आपराधिक मुकदमे के विचाराधीन रहते हुए समान आरोपों और गवाहों के आधार पर विभागीय जांच जारी रखना उचित नहीं है। अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के कैप्टन एम. पॉल एंथनी विरुद्ध भारत गोल्ड माइंस लिमिटेड, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया विरुद्ध नीलम नाग (2016) और अविनाश सदाशिव भोसले विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया (2012) सहित विभिन्न फैसलों का हवाला दिया।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

अधिवक्ताओं के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व के फैसलों में स्पष्ट किया है कि यदि आपराधिक मुकदमे और विभागीय जांच में आरोपों की प्रकृति समान हो और दोनों में गवाह भी एक ही हों, तो परिस्थितियों के आधार पर विभागीय जांच को आपराधिक मुकदमे में गवाहों के बयान दर्ज होने तक स्थगित रखा जा सकता है।

हाईकोर्ट ने विभागीय जांच पर लगाया स्टे

दोनों पक्षों की दलीलों के बाद हाईकोर्ट ने अनामिका जैन की रिट याचिका स्वीकार कर ली और उनके खिलाफ संचालित विभागीय जांच की कार्रवाई पर स्थगन लगा दिया। इस आदेश से एडीशनल एसपी अनामिका जैन को बड़ी राहत मिली है।