

वैवाहिक विवाद में बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला।
राजनांदगांव निवासी रोहित रजक की अपील खारिज।
18 जून 1998 को भिलाई के रिसाली में हुई थी शादी।
आरोपों के आधार पर पति ने की थी तलाक की मांग।
Bilaspur High Court Verdict in Matrimonial Dispute: शादी के कई साल बाद पति-पत्नी अलग रहने लगें, तो क्या सिर्फ इसी आधार पर तलाक मिल सकता है? छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक वैवाहिक विवाद में साफ कर दिया कि लंबे समय तक अलग रहना अपने आप में तलाक का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है। पति को क्रूरता या परित्याग जैसे आधारों को ठोस साक्ष्यों के जरिए साबित करना होगा। न्यायमूर्ति पार्थ प्रीतम साहू और न्यायमूर्ति सुषमा सावंत की खंडपीठ ने राजनांदगांव निवासी रोहित रजक की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पति की तलाक की मांग स्वीकार नहीं की गई थी।
मामले के अनुसार, रोहित रजक और संतोषी रजक की शादी 18 जून 1998 को भिलाई के रिसाली में हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी सरकारी आवास छोड़कर मायके चली गई और अपने साथ नकदी, गहने तथा जमीन के दो भूखंडों के दस्तावेज ले गई। उसने यह भी दावा किया कि पत्नी दूसरी शादी करने के झूठे आरोप लगाकर उसे मानसिक रूप से परेशान करती थी। इन्हीं आरोपों के आधार पर पति ने तलाक की मांग की थी। हालांकि, पत्नी ने इन दावों को खारिज करते हुए पति पर ही प्रताड़ना के आरोप लगाए।
पत्नी ने अदालत में कहा कि पति उसे बांझ कहकर प्रताड़ित करता था और घर से निकाल दिया था। उसने यह भी आरोप लगाया कि पति दूसरी महिला से शादी करने की बात कह चुका था। पत्नी के मुताबिक, भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने के लिए पति ने तलाक का मुकदमा दायर किया था।
हाई कोर्ट ने मामले में पेश साक्ष्यों और पति के बयानों की समीक्षा की। कोर्ट ने पाया कि पति ने स्वीकार किया था कि शादी के शुरुआती 10 से 12 वर्षों तक दोनों के बीच कोई विवाद नहीं था। वह यह भी स्पष्ट नहीं कर सका कि पत्नी आखिर किन परिस्थितियों में मायके चली गई थी।
रिकॉर्ड में ऐसे पर्याप्त साक्ष्य भी नहीं मिले, जिनसे साबित हो सके कि पति ने पत्नी को वापस लाने के लिए लगातार और गंभीर प्रयास किए थे। नकदी और गहने ले जाने के आरोपों को भी उसके बयान से पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। इसके अलावा, मानसिक प्रताड़ना के आरोपों के समर्थन में पति ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। वह यह भी स्पष्ट नहीं कर पाया कि कथित शिकायतें उसने किन लोगों के सामने की थीं।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक अलग रहने या वैवाहिक संबंध टूट जाने की दलील मात्र से तलाक नहीं दिया जा सकता। संबंधित कानूनी आधारों को साक्ष्यों के जरिए साबित करना जरूरी है। अदालत ने माना कि पति क्रूरता और परित्याग के आधारों को प्रमाणित करने में विफल रहा। इसी वजह से उसकी अपील खारिज कर दी गई और पारिवारिक न्यायालय का फैसला बरकरार रहा।