

Bhilai Municipal Corporation Election : भिलाई नगर निगम चुनाव की आहट तेज हो गई है। 70 वार्डों में टिकट के दावेदार लगातार सक्रिय हैं। पार्षद और महापौर पद के लिए चर्चाएं जारी हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों दल रणनीति बना रहे हैं। टिकट वितरण में संगठन और नेताओं का प्रभाव देखा जाएगा।
भिलाई नगर निगम चुनाव पास आते ही माहौल गरमा गया है। शहर के सभी 70 वार्डों में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों में दावेदार जुट गए हैं।
पार्षद से लेकर महापौर पद तक की रेस शुरू हो चुकी है। संभावित प्रत्याशी अब अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
दावेदारों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है। क्या टिकट वितरण में संगठन की प्रक्रिया ही मुख्य होगी? या फिर बड़े नेताओं की पसंद को तरजीह दी जाएगी? भाजपा में जिला और संभाग प्रभारियों की बैठकें जारी हैं। इन बैठकों के बीच कार्यकर्ताओं में उलझन साफ दिख रही है।
जिले के राजनीतिक गलियारों में गुटीय समीकरणों की चर्चा है। कुछ वरिष्ठ नेता संभावित नामों का संकेत दे रहे हैं। इन संकेतों ने कई पुराने दावेदारों की चिंता बढ़ा दी है। कार्यकर्ता समझ नहीं पा रहे कि कहां अर्जी लगाई जाए। वे संगठन के सामने जाएं या बड़े नेताओं से मिलें।
दोनों पार्टियां आंतरिक स्तर पर सर्वे करा रही हैं। जनता से जमीनी फीडबैक भी लगातार लिया जा रहा है। महापौर पद के लिए भी कई दिग्गज कतार में हैं। चुनाव की घोषणा से पहले स्थानीय संपर्क और बढ़ेगा। उसी प्रत्याशी को मौका मिलेगा जिसकी पकड़ मजबूत होगी।
कांग्रेस के दावेदार भी पूरी तरह से सक्रिय हो चुके हैं। वे वार्ड में अपनी मजबूत पकड़ दिखाने में लगे हैं। हालिया बैठकों के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। कई नेता दूसरों का नाम आगे बढ़ा रहे हैं। इस बहाने वे खुद के लिए भी माहौल बना रहे हैं।