

Chhattisgarh High Court Death Sentence : झीरम घाटी हत्याकांड में विशेष अदालत के फैसले के बाद अब पूरे मामले की नजर हाई कोर्ट पर टिक गई है। जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत ने मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। अब इसी सजा की पुष्टि के लिए मामला हाई कोर्ट भेजा गया है। यानी विशेष अदालत के फैसले के बावजूद दोषियों को फांसी देने का रास्ता अभी साफ नहीं हुआ है।
दरअसल, किसी भी मामले में निचली अदालत अगर मृत्युदंड सुनाती है तो उस पर अमल से पहले हाई कोर्ट की मंजूरी जरूरी होती है। इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत झीरम मामले में भी विशेष अदालत ने सजा की पुष्टि के लिए हाई कोर्ट को संदर्भ भेजा है। अब हाई कोर्ट पूरे मामले और निचली अदालत के फैसले की समीक्षा करेगा।
25 मई 2013 को सुकमा जिले की दरभा घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर के नाम से चर्चित महेंद्र कर्मा समेत कई बड़े नेताओं और सुरक्षा कर्मियों की जान गई थी। झीरम घाटी की यह घटना छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक और नक्सली हमलों में गिनी जाती है।
घटना के बाद इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने की। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने आरोपियों को दोषी माना और 10 लोगों को मृत्युदंड सुनाया।
अब हाई कोर्ट के सामने सिर्फ सजा की पुष्टि का सवाल नहीं होगा, बल्कि निचली अदालत के पूरे फैसले की कानूनी समीक्षा भी होगी। दोषियों को भी फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले की कानूनी लड़ाई और आगे बढ़ सकती है।
फिलहाल झीरम घाटी कांड में विशेष अदालत का फैसला आ चुका है, लेकिन अंतिम रूप से सजा पर अमल का फैसला अभी बाकी है। 13 साल पुराने इस मामले में अब अगली बड़ी तारीख और हाई कोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी।