बस्तर में मांझियों और चालकियों को मिलेगा मानदेय, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का ऐलान

Bastar Manjhi Chalki Honorarium Hike : मुरिया दरबार में सीएम साय का बड़ा ऐलान, बस्तर के मांझियों को 5000 रूपए और चालकियों को 3500 रूपए प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।
Monthly Honorarium for Bastar Tribal Leaders
विष्णु देव सायसोर्स - नवभारत लाइव
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Highlights

  • जगदलपुर में मुरिया दरबार के अवसर पर बड़ा ऐलान हुआ।

  • बस्तर के मांझियों को अब हर महीने ₹5000 मानदेय मिलेगा।

  • चालकियों को प्रतिमाह ₹3500 देने की घोषणा की गई है।

  • यह फैसला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मौजूदगी में लिया गया।

  • सरकार बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना चाहती है।

Bastar Tribal Leaders Monthly Salary : जगदलपुर में बस्तर दशहरा का आयोजन हुआ। इस दौरान मुरिया दरबार भी सजाया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ी घोषणा की। अब मांझियों को ₹5000 प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। चालकियों को हर महीने ₹3500 दिए जाएंगे। इस फैसले से पारंपरिक प्रतिनिधियों को राहत मिलेगी। उनकी लंबे समय से मानदेय की मांग थी। सरकार ने उनके आर्थिक सम्मान का रास्ता खोला। इस घोषणा की अब हर तरफ चर्चा है।

राष्ट्रपति की ऐतिहासिक मौजूदगी

बस्तर दशहरा उत्सव में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने उनका जगदलपुर में स्वागत किया। राष्ट्रपति का बस्तर से पुराना और गहरा लगाव है। इसी साल उन्होंने बस्तर पंडुम की शुरुआत की। उन्होंने विजेताओं को राष्ट्रपति भवन में सम्मानित किया। इस बार उनकी मौजूदगी ने उत्सव को खास बनाया। स्थानीय जनजातीय समाज में इससे भारी उत्साह दिखा। आयोजन में सांस्कृतिक परंपरा की झलक साफ दिखी।

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75 दिन की अनोखी परंपरा

बस्तर का दशहरा पूरे 75 दिनों तक चलता है। यह उत्सव लोक संस्कृति का बड़ा आईना है। इसकी रस्में समाज में समानता का संदेश देती हैं। सभी लोग आपस में मिलकर काम करते हैं। सामूहिक सहभागिता इस उत्सव की मुख्य पहचान है। मुरिया दरबार में लोकतांत्रिक परंपरा की झलक मिलती है। इसमें समाज के लोग सीधे संवाद करते हैं। यह बस्तर की पुरानी और जीवंत पहचान है।

शांति के साथ नवनिर्माण

बस्तर अब हिंसक माओवाद से मुक्त हो रहा है। क्षेत्र में अब सुरक्षा और विकास दिख रहा है। सरकार अब नवनिर्माण पर ध्यान दे रही है। सांस्कृतिक पहचान को सहेजने का काम तेज है। विकास की नई संभावनाएं अब तैयार की जा रही हैं। मांझियों और चालकियों के लिए मानदेय जरूरी कदम है। इससे बस्तर की बदलती तस्वीर साफ नजर आती है। लोग अब इस फैसले के अमल का इंतजार कर रहे हैं।

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