

केके रेलमार्ग पर एक महीने बाद यातायात बहाल
मालिगुडा भूस्खलन से रेल सेवा प्रभावित हुई थी
411 करोड़ रुपये के माल परिवहन पर असर
एनएमडीसी की लौह अयस्क ढुलाई पर पड़ा प्रभाव
मालगाड़ियों की आवाजाही शुरू, यात्री ट्रेनों का इंतजार
Bastar Line Passenger Train Status : ओडिशा के मालिगुडा क्षेत्र में भारी भूस्खलन हुआ था। इससे तीन स्थानों पर रेलवे ट्रैक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। यह घटना 24 सितंबर को हुई थी। इसके बाद से रेल यातायात पूरी तरह ठप था।
रेलवे के कई विभागों ने दिन-रात काम किया। इंजीनियरिंग और सिग्नल टीमों ने मिलकर ट्रैक को ठीक किया। 23 अक्टूबर को बहाली का काम पूरा कर लिया गया। इसके बाद मालगाड़ियों को चलाने की अनुमति दी गई।
इस रेलमार्ग को बस्तर की औद्योगिक लाइफलाइन कहा जाता है। एक महीने तक ट्रेनें बंद रहने से बड़ा असर पड़ा। नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन की ढुलाई रुक गई।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक करोड़ों का माल परिवहन प्रभावित हुआ। अनुमानित आंकड़े के अनुसार करीब 411 करोड़ रुपये का असर पड़ा। सितंबर महीने में लौह अयस्क की बिक्री भी कम दर्ज की गई।
सितंबर में एनएमडीसी की छत्तीसगढ़ इकाई की लौह अयस्क बिक्री में भी गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में बिक्री 21.3 लाख टन रही, जबकि सितंबर 2025 में यह 25.8 लाख टन थी। यानी सालाना आधार पर 4.5 लाख टन की कमी आई। हालांकि, इस गिरावट का पूरा कारण रेलमार्ग पर भूस्खलन को नहीं माना जा सकता।
केके रेललाइन का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि बैलाडीला क्षेत्र से निकलने वाले लौह अयस्क की ढुलाई का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होता है। एनएमडीसी की परियोजना संबंधी जानकारी के अनुसार, कंपनी ने किरंदुल-जगदलपुर रेललाइन के दोहरीकरण के लिए भी वित्तीय सहयोग दिया है। ऐसे में इस मार्ग पर लंबे समय तक परिचालन बंद रहना खनिज परिवहन की क्षमता और औद्योगिक आपूर्ति दोनों के लिए चुनौती बना।
रेलवे ट्रैक बंद होने से आम यात्रियों को भारी परेशानी हुई। जगदलपुर और आसपास के लोगों की ट्रेनें रद्द कर दी गईं। बस्तर दशहरा के दौरान आने वाले यात्रियों को भी दिक्कत हुई।
अब मालगाड़ियों के चलने से राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि यात्री ट्रेनें कब चलेंगी यह साफ नहीं है। रेलवे पहले सुरक्षा जांच पूरी करना चाहता है।
रेलवे के सामने अब कई बड़ी चुनौतियां हैं। सुरक्षा मानकों के साथ ट्रेनों का नियमित संचालन करना है। साथ ही माल ढुलाई को पुरानी गति पर लाना जरूरी है।
एनएमडीसी और रेलवे मिलकर नुकसान की भरपाई की कोशिश कर रहे हैं। बस्तर के खनिज परिवहन को फिर से पटरी पर लाया जा रहा है। आने वाले दिनों में यात्री सेवाएं भी शुरू हो सकती हैं।