बलौदाबाजार भाटापारा में गूंजने लगी सुआ नृत्य की थाप, विलुप्त होती लोक परंपरा को सहेजने की पहल

Chhattisgarh Sua Dance: दीपावली के अवसर पर महिलाओं द्वारा घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों के सामने सुआ नृत्य प्रस्तुत कर लोगों से नेग लेने की परंपरा सदियों पुरानी है।
Chhattisgarh Sua Dance 2026,
सुआ नृत्य(सोर्स - नवभारत लाइव)
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Highlights

  • रंग बिरंगे परिधानों में सजी महिलाएं कर रहीं सुआ नृत्य।

  • दुकानों और कार्यालय में जाकर नेग लेने की परंपरा।

  • पारंपरिक गीतों और तालियों की थाप।

Chhattisgarh Folk Culture Sua Dance: दीपावली पर्व नजदीक आते ही शहर में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक संस्कृति की छटा बिखरने लगी है। दीपावली के अवसर पर महिलाओं द्वारा घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों के सामने सुआ नृत्य प्रस्तुत कर लोगों से नेग लेने की परंपरा सदियों पुरानी है। हालांकि आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव के चलते यह परंपरा धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है, लेकिन आज भी कुछ महिलाएं इस सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने के लिए पूरे उत्साह के साथ सुआ नृत्य कर रही हैं।

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सुआ नृत्य बनी आकर्षण का केंद्र

इन दिनों भाटापारा से पूरे बलौदा बाजार भाटापारा जिले की सड़कों और बाजारों में महिलाओं की टोलियां सुआ नृत्य करती नजर आ रही हैं। विभिन्न रंग के पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी महिलाएं दुकानों और कार्यालयों के सामने पहुंचकर सुआ नृत्य की प्रस्तुति दे रही हैं। पारंपरिक गीतों और तालियों की थाप के बीच महिलाएं नृत्य कर लोगों से नेग स्वरूप पैसे प्राप्त कर रही हैं। उनकी यह प्रस्तुति बाजार में आने-जाने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत का हिस्सा

सुआ नृत्य छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कभी गांवों और कस्बों में दीपावली के दौरान इसकी विशेष रौनक देखने को मिलती थी, लेकिन बदलते दौर में नई पीढ़ी के बीच इन पारंपरिक लोक कलाओं का प्रचलन कम होता जा रहा है। ऐसे में भाटापारा की कुछ महिलाओं द्वारा सुआ नृत्य के माध्यम से इस परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास सराहनीय है। लोक संस्कृति से जुड़ी ऐसी परंपराओं को सहेजना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बनी रहे।