

NTA Permanent Staff Shortage: NEET पेपर लीक विवाद ने न केवल देश की परीक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के आंतरिक ढांचे की एक चौंकाने वाली हकीकत भी सामने ला दी है। करोड़ों छात्रों का भविष्य तय करने वाली इस एजेंसी का प्रबंधन और कामकाज किस तरह चल रहा है, इसे लेकर संसद में दी गई जानकारी ने सबको हैरान कर दिया है।
हाल ही में लोकसभा में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, NTA के कुल वर्कफोर्स का लगभग 89% हिस्सा कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों पर निर्भर है। वर्तमान में एजेंसी में कुल 221 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें से केवल 24 कर्मचारी (11%) ही सरकारी प्रतिनियुक्ति पर हैं। बाकी 197 लोग अस्थायी तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
एजेंसी के स्टाफिंग पैटर्न को देखें तो इसकी संरचना काफी अस्थिर नजर आती है। NTA में 73 लोग कॉन्ट्रैक्ट पर हैं, जिनमें सलाहकार, जनरल मैनेजर (कम्युनिकेशन), और यंग प्रोफेशनल्स शामिल हैं। वहीं, 124 कर्मचारी आउटसोर्स किए गए हैं, जो लीगल हेल्प, डेटा एनालिसिस और हाउसकीपिंग जैसे महत्वपूर्ण सपोर्ट फंक्शन संभालते हैं। इतनी संवेदनशील परीक्षाओं की जिम्मेदारी ऐसे स्टाफ के भरोसे होना, जो सीधे तौर पर एजेंसी के प्रति स्थायी जवाबदेही नहीं रखते, एक बड़ा सुरक्षा जोखिम माना जा रहा है।
NEET पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद NTA ने कड़ा रुख अपनाया है। एजेंसी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 47 अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इनमें से कुछ अधिकारियों के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई की जा रही है, बल्कि क्रिमिनल केस चलाने की भी तैयारी है। यह कदम एजेंसी के भीतर फैले भ्रष्टाचार और लापरवाही को खत्म करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
विवादों के बाद अब सरकार NTA को प्रशासनिक रूप से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत 16 नए सीनियर पद बनाए गए हैं, जिनमें 8 डायरेक्टर और 8 जॉइंट डायरेक्टर स्तर के अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। इसके अलावा जनरल मैनेजर स्तर के 4 अन्य अधिकारियों की नियुक्ति की भी योजना है, ताकि एजेंसी के मैनेजमेंट को सुधारा जा सके।
2018 में एक स्वायत्त संस्था के तौर पर शुरू हुई NTA ने अब तक 270 से ज्यादा परीक्षाएं आयोजित की हैं, जिनमें 6.6 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया है। अकेले 2026 में अब तक 12 परीक्षाओं के लिए 65 लाख से ज्यादा छात्र रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। इतने बड़े पैमाने पर काम करने वाली संस्था का स्थायी स्टाफ की भारी कमी से जूझना, भविष्य की परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।