विदेश से लौटे मेडिकल छात्रों के लिए राहत भरी खबर, आसान होगी FMGE परीक्षा, ग्रेस मार्क्स की मांग खारिज

FMGE Exam: विदेशों से MBBS करके आने वाले भारतीय छात्रों के लिए FMGE परीक्षा में 4 बड़े बदलावों की तैयारी है, जिससे परीक्षा आसान होगी। हालांकि, जून सत्र के ग्रेस मार्क्स की मांग खारिज कर दी गई है।
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सांकेतिक फोटो सोर्स- AI
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FMGE Passing Criteria Relaxation: विदेशों से MBBS की पढ़ाई करके भारत लौटने वाले मेडिकल छात्रों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार विदेशों से डिग्री लेकर आने वाले भारतीय छात्रों को विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (FMGE) में बड़ी राहत देने की तैयारी कर रही है। सरकार इस चुनौतीपूर्ण टेस्ट को आसान और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण और बड़े बदलावों पर गंभीरता से विचार कर रही है। हालांकि, हाल ही में आयोजित हुई परीक्षा में ग्रेस मार्क्स (अतिरिक्त अंक) की मांग कर रहे छात्रों को सरकार ने बड़ा झटका भी दिया है।

क्यों हो रही है FMGE परीक्षा को आसान बनाने की तैयारी?

भारत में डॉक्टरी करने और पंजीकरण प्राप्त करने के लिए विदेश से एमबीबीएस करके आए छात्रों को FMGE परीक्षा पास करना कानूनन अनिवार्य होता है। लेकिन इस परीक्षा को पास करना बेहद कठिन माना जाता है। आमतौर पर इसका कुल रिजल्ट महज 15 से 25 फीसदी के बीच ही रहता है। इस बार जून 2026 सत्र की परीक्षा का नतीजा तो और भी निराशाजनक रहा और यह गिरकर केवल 12.38 फीसदी पर आ गया, जो पिछले 3-4 वर्षों के औसत से लगभग आधा है। जून की परीक्षा के बेहद कठिन होने के कारण छात्र देश भर में आंदोलन कर रहे हैं और लगातार ग्रेस मार्क्स की मांग कर रहे हैं। इसी तनाव को देखते हुए सरकार अब परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधार करने जा रही है।

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सरकार लागू कर सकती है ये 4 बड़े बदलाव

सरकारी सूत्रों के अनुसार, एक विशेष समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार निम्नलिखित राहतों पर अमल करने की तैयारी में है:

  • साल में 3 बार परीक्षा: अभी तक यह परीक्षा साल में केवल दो बार (जून और दिसंबर सत्र में) आयोजित की जाती है। अब इसे बढ़ाकर साल में तीन बार करने पर विचार हो रहा है ताकि छात्रों को तैयारी के लिए अधिक अवसर मिल सकें।

  • प्रश्नों का नया कठिनता पैटर्न : परीक्षा के प्रश्नों को अब तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा। इसमें 30 फीसदी आसान (निम्न), 50 फीसदी मध्यम और केवल 20 फीसदी कठिन (उच्च) प्रश्न शामिल किए जाएंगे ताकि छात्रों के लिए इसे पास करना थोड़ा सुगम हो सके।

  • कम हो सकती है फीस: परीक्षा शुल्क की समीक्षा की जाएगी जिससे छात्रों पर आर्थिक बोझ कम हो सके।

  • पारदर्शिता: परीक्षा केंद्रों के आवंटन को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा और छात्रों की अन्य सभी चिंताओं का भी समाधान किया जाएगा।

ग्रेस मार्क्स पर सरकार का रुख सख्त, छात्रों को झटका

भले ही सरकार भविष्य की परीक्षाओं को आसान बनाने की योजना पर काम कर रही है, लेकिन वर्तमान में आंदोलन कर रहे छात्रों के लिए बुरी खबर है। सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जून 2026 सत्र की परीक्षा के लिए छात्रों को कोई भी ग्रेस मार्क्स (अतिरिक्त अंक) नहीं दिए जाएंगे। जून सत्र के कठिन पेपर के कारण छात्र अतिरिक्त अंक देने की गुहार लगा रहे थे, लेकिन सरकार ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।

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पहली बार परीक्षा देने वाले छात्रों का गिरा प्रदर्शन ग्राफ

आंकड़े बताते हैं कि पहली बार परीक्षा में बैठने वाले छात्रों के प्रदर्शन में भारी गिरावट आई है। दिसंबर 2025 में पहली बार में परीक्षा पास करने वालों का प्रतिशत 47.53% था, जो जून 2026 में घटकर महज 35.74% रह गया। जून 2026 की परीक्षा में ऐसे उम्मीदवार अधिक संख्या में पास हुए हैं जो 5 या उससे अधिक बार परीक्षा दे चुके थे। आपको बता दें कि हर साल औसतन 35 से 40 हजार विदेशी चिकित्सा स्नातक इस परीक्षा में बैठते हैं, जिनमें से लगभग 10 हजार पहली बार परीक्षा देने वाले छात्र होते हैं।

आंकड़ों में समझें पिछले 6 वर्षों का पास प्रतिशत

FMGE परीक्षा पास करने के लिए छात्रों को 300 में से कम से कम 150 अंक (50%) हासिल करना अनिवार्य होता है। पिछले 13 सत्रों का औसत पास प्रतिशत 21.47% रहा है। आइए नजर डालते हैं पिछले कुछ वर्षों के सत्रों के नतीजों पर:

  • वर्ष 2020: जून में 11.62% और दिसंबर में 21.75%।

  • वर्ष 2021: जून में 23.71% और दिसंबर में 23.61%।

  • वर्ष 2022: जून में 10.61% और दिसंबर में 30.83%।

  • वर्ष 2023: जून में केवल 10.22% (सबसे कम रिजल्ट) और दिसंबर में 31.25% (सबसे अधिक रिजल्ट)।

  • वर्ष 2024: जून में 20.71% और दिसंबर में 29.02%।

  • वर्ष 2025: जून में 18.61% और दिसंबर में 23.90%।

  • वर्ष 2026: जून में केवल 12.38%।

इस विश्लेषण से साफ है कि सरकार के प्रस्तावित नए बदलावों से विदेशों से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हजारों छात्रों के भारतीय डॉक्टर बनने की राह आने वाले समय में काफी आसान हो सकती है।

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