जिला मजिस्ट्रेट (सौजन्य : सोशल मीडिया)
नई दिल्ली : आज देश के लाखों युवा डीएम या जिलाधिकारी बनने का सपना देखते है, जिसके लिए लोग सिविल सेवा की परीक्षा देते हैं। इस नौकरी में आपको दौलत के साथ रुतबा भी मिलता है। इस जॉब में आपको अच्छी खासी सैलरी के साथ-साथ कई और सुविधाएं भी मिलती है। आज हम आपको जानकारी देते है कि एक डीएम को कितनी सुविधाएं और सैलरी मिलती है और ये पद मिलने के बाद आपके पास कितनी पॉवर मिल सकती है।
जिला अधिकारी या जिला मजिस्ट्रेट जिसे शॉर्ट फॉर्म में डीएम भी कहा जाता है। डीएम के रुप में आप जिस जिले में तैनात होते है, उसी जिले के आप मुख्य अधिकारी भी होते हैं। जिला मजिस्ट्रेट जिसे डीएम भी कहा जाता है, इस पद का सृजन 1772 में वारेन हेस्टिंग द्वारा सिविल एडमिनिस्ट्रेशन चलाने और लैंड रेवेन्यू वसूल करने के लिए किया गया है। इसे लैंड रेवेन्यू वसूल करने, लैंड रजिस्ट्रेशन, विवादों का निपटारा करने, कानून व्यवस्था बनाए रखने और अन्य काम करने की जिम्मेदारी हासिल होती है। साथ ही डीएम का काम पुलिस और अधीनस्थ कोर्ट्स के सुपरविजन के लिए अधिकृत था।
इस समय में डीएम के पास एक आईएएस ऑफिसर भी होता है, जो सिविल सर्विस एग्जाम में सिलेक्ट होता है। हर साल संघ लोक सेवा आयोग द्वारा सिविल सर्विस की परीक्षा का भी आयोजन किया जाता है। इस एग्जाम के अंतर्गत विभिन्न सर्विसेज के लिए कैंडिडेट्स के चुना जाता है, जिसमें से एक आईएएस पद का भी समावेश होता है।
ये भी पढ़ें :- PM Internship Scheme- आज से पीएम इंटर्नशिप के आवेदन शुरु, युवा इन बातों का ध्यान रख जल्दी कर दें आवेदन
एक डीएम को हर महीने तकरीबन 80,000 सैलरी दी जाती है। साथ ही डीएम को टीए, डीए, एचआरए सहित कई और प्रकार के अलॉउंसेस भी मिलते है। इस सब को मिलाकर देखा जाए तो डीएम की सैलरी 1 लाख रुपये से भी ज्यादा हो जाती है।
आपको बता दें कि एक डीएम को तरह तरह की सुविधाएं भी मिलती है। अगर कोई डीएम पद पर कार्यरत होता है, तो उसे सरकार की ओर से रहने के लिए सरकारी बंगला भी दिया जाता है। साथ ही आने जाने के लिए उसे सरकारी गाड़ी भी दी जाती है। इसके अलावा उन्हें कार, ड्राइवर और नौकर जैसी सुविधाएं भी दी जाती है। उनके बंगले पर चपरासी, माली व कुक के अलावा भी अन्य कामों को करने के लिए कर्मचारी भी उपलब्ध होते हैं।