क्या फिर ‘वर्क फ्रॉम होम’ पर लौटेगी दुनिया? ईंधन संकट के बीच उठा सवाल, जानें क्या है एक्सपर्ट का जवाब
LPG Crisis Impact: एक्सपर्ट मान रहें हैं कि आने वाले समय में कूंकिंग लिए LPG पर निर्भरता कम करनी होगी। इसी कारण इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव और ई-कुकिंग जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की बात की जा रही है।
- Written By: मनोज आर्या
वर्क फ्रॉम होम, (कॉन्सेप्ट फोटो)
Work From Home Amid LPG Crisis: मिडिल ईस्ट में 11 दिनों से जारी तनाव का असर अब दुनियाभर में दिखने लगा है। अन्य देशों के साथ भारत की ऊर्जा सप्लाई और ईंधन बाजार इससे प्रवाभित हुई है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति खास तौर पर अहम है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है। बढ़ती कीमतों और वैश्विक हालात के बीच अब यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या ईंधन बचाने के लिए फिर से वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्था लागू की जा सकती है।
भारत अपनी जरूरत की दो-तिहाई एलपीजी आयात करता है, जिसका 90% हिस्सा कतर, यूएई और सऊदी अरब जैसे देशों से आता है। इन देशों से आने वाले जहाज ‘होर्मुज स्ट्रेट’ के रास्ते भारत पहुंचते हैं। ईरान ने फिलहाल इस रास्ते को बंद कर दिया है, जिसकी वजह से एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई ठप हो गई है।
क्या फिर लागू हो सकता है वर्क फ्रॉम होम
इस सप्लाई संकट का असर दिखना शुरू हो गया है। 7 मार्च से घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़ चुके हैं। सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए रिफाइनरियों को 100% क्षमता पर काम करने का आदेश दिया है ताकि देश में ईंधन की कमी न हो। इन हालातों के बीच इन्वेस्टमेंट बैंकर सार्थक आहूजा ने एक दिलचस्प संभावना जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि अगर ईंधन संकट गहराता है तो सरकार कुछ समय के लिए वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य करने का फैसला ले सकती है।
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उन्होंने बताया कि थाईलैंड और फिलीपींस जैसे देशों में कंपनियों को पहले ही सलाह दी गई है कि वे कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दें और विदेश यात्राओं को केवल आपात स्थिति तक सीमित रखें। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके।
रेस्तरां, उड़ानें और स्कूल पर भी असर
सार्थक आहूजा के कहा कि भारत में भी इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली गैस को अब घरों की ओर डायवर्ट किया जा रहा है। आने वाले समय में होटल और रेस्टोरेंट की गैस सप्लाई रोकी जा सकती है ताकि आम लोगों को घर में खाना पकाने के लिए गैस मिलती रहे। इसके अलावा जेट फ्यूल की कमी के कारण उड़ानों के किराए बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में कुछ समय के लिए स्कूलों में भी ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
ई-कुकिंग की ओर बढ़ने की जरूरत
एक्सपर्ट का मानना है कि आने वाले समय में भारत को खाना पकाने के ईंधन के लिए LPG पर निर्भरता कम करनी होगी। इसी कारण इलेक्ट्रिक इंडक्शन स्टोव और ई-कुकिंग जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है। जिन परिवारों के पास पहले से इंडक्शन स्टोव है या जो इसे खरीद सकते हैं, उन्हें LPG की जगह इसका इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
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नीति आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2047 तक भारत में खाना पकाने के ईंधन में LPG की हिस्सेदारी लगभग 15% तक रह सकती है। इसके लिए अगले 10 वर्षों में बड़े बदलाव की जरूरत होगी।
