₹100 की थाली आपके घर तक ₹300 में कैसे पहुंचती है? फूड डिलीवरी कंपनी के CEO ने खुद खोल दी कमीशन की पोल

Online Food Delivery Charges: होम डिलीवरी के नाम पर ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां 100 रुपये की खाने के लिए 300 से 400 रुपये तक का चार्ज कर रही हैं। लेकिन, ऐसा क्यो? आइए जानते हैं।
Why Online Food Becomes Costlier
कॉन्सेप्ट फोटो, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Why Online Food Becomes Costlier: पिछले कुछ समय में ऑनलाइन फूड का कारोबार भारत में काफी तेजी से फैला है। होम डिलीवरी के नाम पर ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियां 100 रुपये की खाने के लिए 300 से 400 रुपये तक का चार्ज कर रही हैं। समय की कमी या घर में बैठे खाना पाने की चाहत में लोग बिना किसी सवाल के धड़ेल्ले से फूड की ऑनलाइन ऑर्डर कर रहे हैं।

हालांकि, यह सवाल काफी समय से उठ रहा है कि कि 80 रुपये के खाने के लिए 300 रुपये तक का चार्ज क्यों वसूला जा रहा है। इन्हीं सवालों के बीच रैपिडो के सीईओ ने ऑनलाइन फूड कंपनियों की कमीशन के खेल का पोल खोल दिया है।

'जोमैटो और स्विगी बड़े ब्रांड्स तक सीमित'

रैपिडो के सीईओ अरविंद सांका का कहना है कि तीन साल में ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने वाले लोगों की संख्या 10 करोड़ तक नहीं पहुंचती, तो कंपनी के फूड डिलीवरी बिजनेस 'ओनली' होने का कोई मतलब नहीं रह जाता। उनके मुताबिक, जोमैटो और स्विगी ने मार्केट में सिर्फ बड़े नेशनल ब्रांड्स तक सीमित रखा, जबकि लोकल रेस्टोरेट इस मॉडल से पीछे छूट गए। इससे मार्केट का विस्तार में रुकावट आ गई।

100 रुपये के खाने का चार्ज 300 रुपये क्यों?

एक इंटरव्यू के दौरान अरविंद सांका ने कहा कि रेस्टोरेंट में जो खाना 80 से 120 रुपये में मिलता है, वही ऑर्डर कमीश्न मार्कअप, डिलीवरी चार्ज के बाद 250 रुपये से 300 रुपये तक का हो जाता है। सांका का दावा है कि यही महंगी चार्ज कई छोटे और स्थानीय रेस्टोरेंट को डिलीवरी प्लेटफॉर्म से दूर कर देती है, क्योंकि वे इस तरह के महंगे और अतिरिक्त चार्च से खुद को बचाना चाहते हैं।

रैपिडो की एंट्री से ऑनलाइन ऑर्डर होगा सस्ता

सांका के मुताबिक, रैपिडो का दांव जीरो-कमीश्न मॉडल है, जिसमें रेस्टोरेंट मेन्यू की कीमत वही रखेंगे जो दुकान पर है और मुनाफा कमीश्न बढ़ाने के बजाय लॉजिस्टिक्स में सुधार से कमाया जाएगा। कंपनी के 30 लाख से अधिक एक्टिव राइडर हर रोज 75 लाख रुपये से ज्यादा बाइक-टैक्सी, ऑटो और कैब ऑर्डर को संभालते हैं। यही नेटवर्क फूड डिलीवरी को और भी सस्ता बनाने का काम करेगा।

हर रोज होने वाले ऑनलाइन ऑर्डर के आंकड़े

एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर रोज 50 से 60 लाख के बीच ऑइनलाइन फूड ऑर्डर दिए जाते हैं, जिसकी कुल वैल्यू लगभग 200 से 250 करोड़ रुपये के आसपास रहता है। देश के भीतर ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट में Zomato और Swiggy का वर्चस्व है, जो टोटल ऑर्डर का बड़ा हिस्सा संभालती हैं। वहीं, अगर सालाना आंकड़ों की बात करें तो भारत में यह 76,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।

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