बजट 2026, ( कॉन्सेप्ट फोटो)
Union Budget 2026: आगामी 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला केंद्रीय बजट भारतीय टैक्स सिस्टम के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित होने वाला है। विशेषज्ञ इसे ‘मेक और ब्रेक’ (Make or Break) बजट मान रहे हैं, क्योंकि यह केवल आय और व्यय का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि टैक्स सिस्टम के भविष्य की दिशा तय करने वाला है।
भारत इस समय दो समानांतर टैक्स व्यवस्थाओं (Old vs New Tax Regime) के बीच खड़ा है। सरकार ने ‘न्यू टैक्स रिजीम’ को डिफॉल्ट बनाया है, लेकिन पुरानी व्यवस्था अब भी अस्तित्व में है। 2026 के बजट में उम्मीद है कि सरकार पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने या उसे नई के साथ मर्ज करने का बड़ा फैसला ले सकती है। यदि पुरानी व्यवस्था खत्म होती है, तो 80C जैसे निवेशों पर मिलने वाली छूट का क्या होगा? यह सवाल करोड़ों मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए सबसे बड़ा चिंता का विषय है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती महंगाई और घरेलू बाजार में वस्तुओं के दाम बढ़ने से आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ा है। 2026 के बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 करने की पुरजोर मांग है। यह टैक्स सिस्टम के लिए इसलिए क्रिटिकल है क्योंकि उपभोग (Consumption) बढ़ाने के लिए लोगों के हाथ में अधिक पैसा छोड़ना जरूरी हो गया है। 18-20% की ऊंची दर वाले स्लैब को तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता है ताकि कर अनुपालन (Tax Compliance) बढ़े।
वर्तमान में भारत का कैपिटल गेन टैक्स ढांचा काफी जटिल है। अलग-अलग संपत्तियों (शेयर, रियल एस्टेट, गोल्ड) के लिए होल्डिंग पीरियड और टैक्स दरें अलग हैं। निवेशक मांग कर रहे हैं कि इसे ‘वन नेशन, वन कैपिटल गेन टैक्स’ की तर्ज पर सरल बनाया जाए। टैक्स सिस्टम के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शेयर बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच निवेशकों के भरोसे को बनाए रखना अनिवार्य है।
पिछले कुछ वर्षों में कॉर्पोरेट टैक्स में भारी कटौती की गई है, जिससे भारत ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बन सके। हालांकि, अब दबाव व्यक्तिगत आयकर दाताओं (Individual Taxpayers) की ओर से है। बजट 2026 में यह संतुलन बैठाना वित्त मंत्री के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी कि कैसे राजस्व घाटे को कम रखते हुए व्यक्तिगत टैक्स में राहत दी जाए।
2026 का बजट टैक्स प्रशासन में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) के इस्तेमाल पर एक बड़ा रोडमैप पेश कर सकता है। सरकार ‘फेसलेस असेसमेंट’ को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। इससे कर चोरी कम होगी, लेकिन सिस्टम को पारदर्शी और एरर-फ्री बनाना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है।
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बजट 2026 टैक्स सिस्टम के लिए इसलिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि यह तय करेगा कि भारत एक जटिल टैक्स संरचना से निकलकर एक आधुनिक, सरल और पारदर्शी व्यवस्था की ओर कितनी तेजी से कदम बढ़ाता है। क्या यह बजट आम आदमी को राहत देगा या राजस्व जुटाने के लिए सख्त कदम उठाएगा, इसी पर 2026-27 की आर्थिक गति निर्भर करेगी।