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केवल व्यापार ही नहीं, कई मामलों में भारत के लिए खास है पश्चिम एशिया

भारत के जो लोग विदेशों में रहते हैं, हर चार में से एक व्यक्ति पश्चिम एशियाई देशों में रहता है। ये लोग अपने देश को हर साल अरबों डॉलर भेजते हैं, जिसे रेमिटेंस कहा जाता है।

  • By मनोज आर्या
Updated On: Jun 26, 2025 | 08:32 AM

प्रतीकात्मक तस्वीर

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारत के हितों पर खतरा मंडरा रहा है। इसका असर सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय नागरिकों, छात्रों और कामगारों की सुरक्षा और भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया से भारत काफी मात्रा में तेल आयात करता है। यदि वहां युद्ध या अशांति होती है, तो तेल महंगा हो सकता है। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।

इजरायल और ईरान में भारतीयों की संख्या बहुत कम है। इजरायल में 0.3% और ईरान में 0.03% है, लेकिन पूरे पश्चिम एशिया में भारत के 3.5 करोड़ प्रवासी भारतीयों में से 25% यहीं रहते हैं। पश्चिम एशिया में लाखों भारतीय मजदूरी या तकनीकी कार्य करते हैं। सबसे ज्यादा भारतीय यूएई (36लाख) और फिर सऊदी अरब (25 लाख) में हैं।

मेडिकल-इंजीनियरिंग के लिए ईरान दूसरा पसंदीदा देश

हाल के वर्षों में खासकर यूएई में उच्च कौशल वाले भारतीय पेशेवरों की संख्या बढ़ी है। इसका कारण टैक्स फ्री सैलरी, कैपिटल गेन टैक्स नहीं, गोल्डन वीजा प्रोग्राम हैं जिसमें खास क्षेत्रों के लोगों को 10 साल तक की रेजिडेंसी मिलती है। यूएई में कई शानदार अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के कैंपस भी हैं, इसलिए यह पढ़ाई के लिए लोकप्रिय बना हुआ है। मेडिकल और इंजीनियरिंग पढ़ाई के लिए ईरान दूसरा पसंदीदा देश है।

अगर इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ता है, तो इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है। जो लोग पढ़ाई या काम के लिए जाने की योजना बना रहे हैं, उनकी योजनाएं बाधित हो सकती हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध से सबक मिल सकता है। यूक्रेन में पढ़ाई करने वाले भारतीय की संख्या 2022 में लगभग 2,200 थी, लेकिन 2024 में घटकर सिर्फ 252 रह गई।

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आर्थिक रूप से भारत के मददगार

भारत के जो लोग विदेशों में रहते हैं, हर चार में से एक व्यक्ति पश्चिम एशियाई देशों में रहता है। ये लोग अपने देश को हर साल अरबों डॉलर भेजते हैं, जिसे रेमिटेंस कहा जाता है। 2023-24 में भारत को कुल 118 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹9.8 लाख करोड़) का रेमिटेंस मिला। बाहरी आर्थिक झटकों से बचाव का एक सुरक्षा कवच भी बनता है। सबसे ज्यादा रेमिटेस अमेरिका से आया है। लेकिन पश्चिम एशियाई देशों ने मिलकर कुल रेमिटेंस का 38% हिस्सा भेजा, यानी करीब 45 अरब अमेरिकी डॉलर। इजरायल और ईरान से भारत को बहुत कम रेमिटेस मिलता है। लेकिन अगर यह संघर्ष और देशों तक फैलता है तो इससे उन देशों में भी अस्थिरता आ सकती है।

West asia is special for india not only in trade but in many matters

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Published On: Jun 26, 2025 | 08:32 AM

Topics:  

  • Business News
  • Israel Iran Tension
  • Today Business News

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