सोमवार को शेयर बाजार में गिरावट की संभावना (सोर्स- सोशल मीडिया)
Stock Market News: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है। करीब 21 घंटे चली इस लंबी बातचीत के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। उनके अनुसार अमेरिका ने ईरान के साथ समझौते की पूरी कोशिश की, लेकिन ईरान ने अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
वेंस ने कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिकी पक्ष ने काफी लचीलापन दिखाया, लेकिन ऐसी स्थिति नहीं बन सकी जिसमें ईरान अमेरिकी प्रस्तावों को स्वीकार करने के लिए तैयार होता। उन्होंने यह भी कहा कि अब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वापस लौट रहा है।
इस वार्ता के विफल होने को सिर्फ अमेरिका और ईरान ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी नकारात्मक संकेत माना जा रहा है। पहले से जारी संघर्ष और तनाव के बीच यह उम्मीद की जा रही थी कि बातचीत से स्थिति में कुछ सुधार होगा, लेकिन अब अनिश्चितता और बढ़ गई है।
वार्ता विफल होने के बाद निवेशकों में घबराहट बढ़ने की आशंका है, जिसका असर सोमवार को वैश्विक शेयर बाजारों पर दिख सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अनिश्चितता बढ़ने पर अक्सर बाजारों में बिकवाली (Panic Selling) देखने को मिलती है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी जैसे सूचकांकों पर दबाव आ सकता है।
तेल और गैस जैसे सेक्टर खास तौर पर प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि उनकी लागत सीधे कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी होती है। अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो एविएशन, ऑटो और टायर जैसे उद्योगों पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक तेल मार्ग को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गई हैं। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। सप्लाई बाधित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है, खासकर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में।
ऐसे वैश्विक तनाव के समय आमतौर पर सोने और चांदी को सुरक्षित निवेश (Safe Haven) माना जाता है, जिससे इनकी मांग बढ़ सकती है। हालांकि, इनकी कीमतों पर सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव ही नहीं, बल्कि डॉलर की स्थिति, ब्याज दरें और वैश्विक आर्थिक रुझान भी असर डालते हैं, इसलिए फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव यानी वोलैटिलिटी की संभावना ज्यादा है।
आने वाले दिनों में स्थिति पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत फिर से शुरू होती है या तनाव और बढ़ता है। अगर बातचीत आगे बढ़ती है तो बाजारों में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन तनाव बढ़ने की स्थिति में वैश्विक बाजारों में और अस्थिरता देखने को मिल सकती है।