दुनिया भर में तेल बेचने को तैयार ईरान, अमेरिका ने हटा लिया बैन, भारत को होगा बड़ा फायदा!
US Iran Deal: अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद तेहरान को अस्थायी राहत मिली है, 21 अगस्त तक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की अनुमति मिली है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ेगा।
- Written By: दिव्या सिंह
तेल बेचने पर ईरान-अमेरिका की डील (सोर्स- सोशल मीडिया)
Iran Oil Export Relief: अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता के बाद ईरान को 60 दिनों के लिए तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात की छूट मिली है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी लाइसेंस के तहत ईरान 21 अगस्त तक कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की बिक्री कर सकेगा। इस फैसले से वैश्विक तेल बाजार में सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है, जिसका फायदा भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हो सकती है।
21 अगस्त तक तेल बेच सकेगा ईरान
समझौते के तहत ईरान को 21 अगस्त तक कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के उत्पादन, परिवहन और बिक्री की अनुमति दी गई है। इसके बदले ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से जहाजों की आवाजाही को प्रभावित नहीं करने का आश्वासन दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता में सकारात्मक प्रगति हुई है।
ट्रेजरी विभाग ने जारी किया विशेष लाइसेंस
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ‘Iran General License X’ जारी किया है। इस लाइसेंस के तहत ईरानी मूल के कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़े कई ऐसे लेन-देन की अनुमति दी गई है, जो पहले प्रतिबंधों के दायरे में आते थे। लाइसेंस के अनुसार, उत्पादन, बिक्री, डिलीवरी और शिपमेंट से जुड़े आवश्यक कारोबारी लेन-देन 21 अगस्त तक वैध रहेंगे।
सम्बंधित ख़बरें
BRICS NSA Meeting: दिल्ली में अजीत डोभाल ने अमेरिका-ईरान डील का किया स्वागत, बोले- उम्मीद है सफल होगा
Iran Nuclear Talks: ईरान ने जेडी वेंस के दावे को नकारा, कहा- परमाणु निरीक्षण की नहीं दी कोई अनुमति
होर्मुज से लेबनान तक ‘डील सफल’! US-ईरान वार्ता के पहले दौर में कई फैसलों पर बनी सहमति, क्या शांत होगी जंग?
शांति वार्ता के बीच नया तनाव, ईरान ने अमेरिकी बातचीत को क्यों दिया ‘मिनाब 168’ नाम? इससे जुड़ा है कनेक्शन
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ना भारत के लिए राहत की खबर हो सकती है। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले भारत उसके प्रमुख तेल खरीदारों में शामिल था।
वर्ष 2019 में अमेरिका द्वारा ईरान पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत ने ईरानी तेल का आयात काफी हद तक कम कर दिया था। इसके बाद रूस और अन्य देशों से तेल आयात बढ़ाया गया।
ये भी पढ़ें- 60 दिन, 6 अरब डॉलर और दुनिया की निगाहें; जानें अमेरिका-ईरान के बीच होने वाले इस समझौते की पूरी इनसाइड स्टोरी
तेल कीमतों और सप्लाई पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की अतिरिक्त तेल आपूर्ति से वैश्विक बाजार में उपलब्धता बढ़ सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव कम होगा। यदि तेल बाजार स्थिर रहता है तो भारत को आयात लागत कम करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह राहत फिलहाल 60 दिनों के लिए है और आगे की स्थिति अमेरिका-ईरान वार्ता के परिणामों पर निर्भर करेगी।
