आज भारतीय शेयर बाजार पस्त (सोर्स-सोशल मीडिया)
Global Market Impact On Sensex: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत हाहाकारी रही और प्रमुख सूचकांकों में गिरावट देखी गई। अमेरिकी शेयर बाजार में मंदी के माहौल ने घरेलू निवेशकों के बीच डर का संचार किया है। एशियाई बाजारों के मिले-जुले संकेतों ने भी भारतीय दलाल स्ट्रीट पर दबाव बनाने का काम किया। बाजार खुलने के साथ ही पिछले दिन की सारी बढ़त गायब होती हुई दिखाई दे रही है।
BSE का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स आज 242 अंकों के नुकसान के साथ खुला। बाजार खुलते ही सेंसेक्स 83052 के स्तर पर पहुंच गया जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। NSE का निफ्टी भी 71 अंकों की कमजोरी के साथ 25641 के लेवल पर खुला।
वॉल स्ट्रीट में सोमवार रात को भारी बिकवाली का दौर चला जिसका असर यहां दिखा। अमेरिकी बाजार का प्रमुख सूचकांक डॉऊ जोन्स 821 अंक तक बुरी तरह टूट गया था। इसके साथ ही एसएंडपी 500 और नैस्डैक में भी एक फीसदी से ज्यादा गिरावट आई।
अमेरिका में टेस्ला और एएमडी जैसी बड़ी टेक कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई। हालांकि दिग्गज टेक कंपनी एनवीडिया के शेयरों में मामूली बढ़त जरूर दर्ज की गई थी। अमेरिकी व्यापार और टैरिफ नीति की अनिश्चितता ने निवेशकों के मनोबल को काफी तोड़ा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संपत्तियों के मुद्रीकरण के लिए NMP 2.0 पेश की है। अगले पांच वर्षों में संपत्तियों से 16.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया। इसमें निजी निवेश के जरिए करीब 5.8 लाख करोड़ रुपये आने की उम्मीद की गई है।
ईरान के साथ परमाणु वार्ता की संभावनाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड गिरकर अब 71.28 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। तेल की कीमतों में यह नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक राहत भरी खबर है।
यह भी पढ़ें: भारतीय परिवारों के लिए स्मार्ट खर्च: कैसे नए कार्ड्स बदल रहे हैं रिवॉर्ड्स का खेल
सोमवार को भारतीय बाजार में जबरदस्त तेजी रही थी और निवेशकों ने बहुत मुनाफा कमाया। सेंसेक्स 480 अंक उछलकर 83294 और निफ्टी 142 अंक चढ़कर 25713 पर बंद हुआ था। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ रद्द करने से बाजार में रौनक आई थी।
बाजार विशेषज्ञ सिद्धार्थ खेमका के अनुसार अभी बाजार एक तय दायरे में ही कारोबार करेगा। हालांकि लंबी अवधि के लिए बाजार का सकारात्मक रुख बने रहने की उम्मीद जताई गई है। निवेशकों को अभी किसी भी बड़े निवेश से पहले वैश्विक घटनाक्रमों को देखना चाहिए।