एक गलती और डूब गई कंपनी, कभी सबकी पसंद थी निरमा; आखिर कैसे मिट गया नामो-निशान
वॉशिंग पाउंडर निरमा को बड़ा ब्रांड बनाया था करसन भाई पटेल ने, कभी साइकिल पर सामान बेचने वाले करसन भाई ने अपनी मेहनत से 17000 करोड़ का कारोबार खड़ा कर लिया।
- Written By: मनोज आर्या
निरमा डिटर्जेंट की बनने और पतन की कहानी
नवभारत डेस्क: 1990 के दशक में जब दूरदर्शन का जमाना था, उस समय एक टीवी विज्ञापन लोगों को काफी आकर्षित करता था और वह था सबकी पंसद निरमा। वॉशिंग पाउडर निरमा ने अपने इस आकर्षक विज्ञापन को लेकर देश के सभी घरों में अपना जगह बना चुका था। हालांकि, समय के साथ सबकुछ ऐसा बदला की अब निरमा का नामो-निशान मिट गया। इन दिनों लोगों के दिमाग में एरियल, टाइड और सर्फ एक्सल के नाम हैं। लेकिन, ऐसी क्या वजह रही कि इतना लोकप्रिय वॉशिंग पाउडर ब्रांड बाजार से एकदम गायब हो गया, आइये जानते हैं निरमा के बाजारों खत्म होने की कहानी।
एक दौर था जब निरमा वॉशिंग पाउडर और विज्ञापन दोनों भारतीय घरों में काफी फेमस थे। लेकिन, धीरे-धीरे कपड़े चमकाने वाले इस पॉपुलर ब्रांड ने अपनी ही चमक खो दी। वॉशिंग पाउंडर निरमा को बड़ा ब्रांड बनाया था करसन भाई पटेल ने, कभी साइकिल पर सामान बेचने वाले करसन भाई ने अपनी मेहनत से 17000 करोड़ का कारोबार खड़ा कर लिया।
बेटी के नाम से बनाया डिटर्जेंट प्रोडक्ट
करसन भाई ने अपनी बिटिया के नाम से ही डिटर्जेंट प्रोडक्ट बनाना शुरू किया था। उनकी यह इच्छा थी कि उनकी यह छोटी बेटी एक दिन पूरी दुनिया में नाम कमाए, लेकिन निरुपमा की अचानक एक एक्सीडेंट में जान चली गई। बेटी की मौत से करसन भाई पटेल बुरी तरह टूट गए। हालांकि, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी स्वर्गवासी बिटिया के नाम से ही डिटर्जेंट प्रोडक्ट बनाना शुरू कर दिया।
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सरकारी नौकरी छोड़ बिजनेस को आगे बढ़ाया
करसन भाई ने निरमा वॉशिंग पाउडर बेचना तो शुरू कर दिया लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि बाजार में मौजूद बड़ी कंपनियों का मुकाबला कैसे करें। इसके लिए उन्होंने नई-नई स्ट्रैटजी अपनानी शुरू की। एक खास तरकीब लगाते हुए करसन भाई पटेल ने हर पैकेट पर लिखना शुरू किया कि ‘कपड़े साफ नहीं हो तो पैसे वापस। करसन भाई पटेल का यह आइडिया काम कर गया और लोगों ने उनका प्रोडक्ट खरीदना शुरू कर दिया। जब करसन भाई पटेल ने देखा कि उनका कारोबार बढ़ रहा है तो उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़कर पूरा ध्यान बाजार पर लगा दिया।
1990 में टॉप प्लेयर बन गई थी निरमा
1969 में करसनभाई पटेल द्वारा शुरू किया गया निरमा अपने सस्ते दाम और प्रभावी मार्केटिंग के दम पर 1990 के दशक तक डिटर्जेंट बाजार में टॉप प्लेयर बन गया। उस समय इसकी बाजार हिस्सेदारी 60% तक पहुंच गई थी। हालांकि, करसन भाई पटेल और निरमा वॉशिंग पाउंडर के लिए असल चुनौती 90 के दशक के बाद शुरू हुई, जब के सर्फ एक्सेल, टाइड और अन्य ब्रांड्स ने नए फॉर्मूलेशन के साथ बाजार में दस्तक देनी शुरू की। उधर, निरमा इन बड़े खिलाड़ियों की आक्रामक रणनीतियों और इनोवेशन का मुकाबला नहीं कर पाया। इसके बाद धीरे-धीरे निरमा की लोकप्रियता घटती गई। एक समय 60% की हिस्सेदारी के साथ बाजार पर राज करने वाला निरमा 2000 के दशक के बाद तेजी से सिमटता गया। आज इसकी हिस्सेदारी महज 6% के आसपास रह गई है।
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वहीं, करसन भाई की कंपनी से एक गलती विज्ञापन में भी हुई। कंपनी को ना जाने क्या सुझा कि इनोवेशन के नाम पर महिला की जगह पुरुष से कपड़े धुलवाने शुरू कर दिए। इसके लिए कंपनी ने ऋतिक रोशन को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया। बस यही विज्ञापन महिलाओं से कनेक्ट नहीं हो सका और निरमा से बाजार आउट हो गया। कभी हेमा मालिनी समेत बॉलीवुड की चार मशहूर एक्ट्रेस निरमा का विज्ञापन करती थीं।
