Stock Market Weekly: वैश्विक तनाव और FII बिकवाली से बाजार कमजोर, अगले सप्ताह क्या रहेगा फोकस ?

Stock Market Weekly Update: वैश्विक तनाव और FII बिकवाली के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार छठे सप्ताह दबाव में रहा। सेंसेक्स 0.65% और निफ्टी 0.22% फिसले, जबकि DII खरीदारी ने गिरावट को सीमित रखा।
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Stock Marketसोर्स- IANS
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Stock Market Weekly Updates: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की आशंकाओं के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार छठे सप्ताह दबाव में रहा। पूरे सप्ताह सेंसेक्स 0.65% और निफ्टी 0.22% कमजोर रहे, हालांकि अंतिम कारोबारी दिन बाजार में सीमित रिकवरी देखने को मिली।

इस बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की मजबूत खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक थामे रखा। अब निवेशकों की नजर अगले सप्ताह आने वाले PMI, क्रेडिट ग्रोथ और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी, जो बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं।

निफ्टी में 0.22% की गिरावट दर्ज

साप्ताहिक आधार पर निफ्टी में 0.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन इसमें 0.33 प्रतिशत की बढ़त आई और यह 23,346 अंक पर पहुंच गया। वहीं सेंसेक्स शुक्रवार को 19 अंक या 0.03 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74,294 अंक पर बंद हुआ।

पूरे सप्ताह में सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत कमजोर रहा। सप्ताह की शुरुआत कमजोर रही, लेकिन बाद में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया ऊंचाई से नरमी आने के कारण भारतीय शेयर बाजार में कुछ रिकवरी देखने को मिली।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और जापान के केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसले काफी हद तक बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहे। ऊर्जा महंगाई को लेकर चिंताएं कम होने से सरकारी बॉन्ड यील्ड पर दबाव कुछ घटा और इससे इक्विटी बाजारों को सीमित राहत मिली।

हालांकि केंद्रीय बैंकों की भविष्य की नीति संबंधी टिप्पणियों ने संकेत दिया कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में मौद्रिक नीति का रुख अभी भी सख्त बना रह सकता है।

इससे लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों का माहौल जारी रहने की संभावना बढ़ गई है। विश्लेषकों का कहना है कि एफआईआई की लगातार बिकवाली ने रुपए पर दबाव बनाए रखा और बाजार की रिकवरी को सीमित कर दिया। इसी वजह से घरेलू शेयर बाजार सप्ताहभर दबाव में रहा।

इस दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बड़े शेयरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। निवेशकों का रुझान ऐसे घरेलू कारोबारों की ओर रहा, जिनकी आय की संभावनाएं मजबूत हैं, ऑर्डर बुक बेहतर है और बैलेंस शीट मजबूत है।

हेल्थकेयर और FMCG में खरीदारी

क्षेत्रीय आधार पर हेल्थकेयर और एफएमसीजी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। इन क्षेत्रों को उनकी स्थिर आय और घरेलू मांग से जुड़े होने के कारण समर्थन मिला।

शुक्रवार को रियल्टी और मेटल शेयर भी मजबूत सेक्टरों में शामिल रहे। दूसरी ओर आईटी सेक्टर पर दबाव जारी रहा और निफ्टी आईटी सूचकांक में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

निफ्टी के लिए 23,000–23,100 बना सपोर्ट

सप्ताह के दौरान मिड और स्मॉलकैप आईटी शेयरों तथा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में भी कमजोरी रही। इसके पीछे वैश्विक प्रौद्योगिकी खर्च को लेकर चिंताएं, ऊंची ब्याज दरों के माहौल में विवेकाधीन मांग पर असर और कीमतों पर दबाव प्रमुख कारण रहे।

तकनीकी दृष्टि से विशेषज्ञों का मानना है कि 23,000-23,100 अंक का दायरा निफ्टी के लिए तत्काल समर्थन (सपोर्ट) क्षेत्र बना हुआ है। वहीं 23,400-23,600 अंक का क्षेत्र निकट अवधि में प्रमुख प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) के रूप में देखा जा रहा है।

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DII ने संभाला बाजार

वहीं एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) लगातार पांचवें सप्ताह शुद्ध विक्रेता बने रहे और उन्होंने 7,620 करोड़ रुपए की बिक्री की।

वहीं दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 11,232 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी के साथ अपनी खरीदारी का सिलसिला जारी रखा, जिससे बाजार को सप्ताह के मध्य के निचले स्तर से उबरने में मदद मिली।

FII ने बेचे 7,620 करोड़ के शेयर

इस महीने अब तक एफआईआई ने 7,041 करोड़ रुपए की शुद्ध बिक्री की है, जबकि डीआईआई ने 36,219 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की है, जिसके चलते निफ्टी अगस्त के अंत में बंद हुए 24,080.40 से 3.05 प्रतिशत नीचे आ गया।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आगे चलकर, एफआईआई की लगातार बिकवाली और वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण बाजार अस्थिर रहने की संभावना है, हालांकि घरेलू संस्थागत खरीद में स्थिरता से गिरावट सीमित रहनी चाहिए।

अमेरिकी आंकड़ों पर रहेगी निवेशकों की नजर

आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर घरेलू ऋण वृद्धि (क्रेडिट ग्रोथ) और पीएमआई आंकड़ों पर रहेगी, जो आर्थिक गतिविधियों की गति का संकेत देंगे।

इसके अलावा अमेरिका के प्रारंभिक बेरोजगारी दावों (जॉबलेस क्लेम्स) के आंकड़े और फेडरल रिजर्व अधिकारियों की टिप्पणियां वैश्विक तरलता, ब्याज दरों की दिशा और वित्तीय बाजारों की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।