बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, (सोर्स- सोशल मीडिया)
Share Market Holiday List: अगर आप शेयर बाजार में ट्रेडिंग करते हैं तो ये खबर आपके लिए ही है। दरअसल, आने वाला सप्ताह ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए छोटा रहने वाला है। दरअसल, मंगलवार 31 मार्च को महावीर जयंती और शुक्रवार 3 अप्रैल को गुड फ्राइडे के मौके पर शेयर बाजार बंद रहेंगे। कहने का मतलब है कि अगले हफ्ते में सिर्फ तीन दिन-सोमवार, बुधवार और गुरुवार को ट्रेडिंग होगी। मंगलवार, शुक्रवार के अलावा शनिवार और रविवार को बाजार बंद रहेगा। बता दें कि शनिवार और रविवार, साप्ताहिक अवकाश का दिन होता है।
कमोडिटी मार्केट की बात करें तो मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) का शेड्यूल थोड़ा अलग रहेगा। महावीर जयंती के दिन MCX में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक का सेशन बंद रहेगा लेकिन शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक ट्रेडिंग फिर से शुरू हो जाएगी। वहीं गुड फ्राइडे के दिन MCX पूरी तरह बंद रहेगा, यानी सुबह और शाम दोनों सत्रों में कोई कारोबार नहीं होगा।
गुड फ्राइडे यानी 3 अप्रैल के बाद अगली छुट्टी 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती के अवसर पर होगी। इसके बाद 1 मई को महाराष्ट्र दिवस और 28 मई को बकरीद पर भी बाजार में कारोबार नहीं होगा। बता दें कि इस हफ्ते भी सिर्फ चार कारोबारी दिन ही ट्रेडिंग हुई है। राम नवमी के कारण गुरुवार को दलाल स्ट्रीट पर ट्रेडिंग नहीं हुई थी। इसके अलावा, शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश की वजह से बाजार बंद रहे।
26 जून को मुहर्रम, 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी और 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के मौके पर बाजार में छुट्टी रहेगी। इसके बाद 20 अक्टूबर को दशहरा, 10 नवंबर को दिवाली बलिप्रतिपदा और 24 नवंबर को गुरु नानक जयंती पर भी ट्रेडिंग नहीं होगी। साल की अंतिम छुट्टी 25 दिसंबर को क्रिसमस के दिन होगी।
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शु्क्रवार को बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,690.23 अंक यानी 2.25 प्रतिशत गिरकर 73,583.22 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 1,739.04 अंक टूटकर 73,534.41 तक पहुंच गया। एनएसई का 50 शेयरों वाला निफ्टी 486.85 अंक यानी 2.09 प्रतिशत गिरकर 22,819.60 पर बंद हुआ। छुट्टियों के कारण कम कारोबारी दिवस वाले सप्ताह में, बीएसई सेंसेक्स 949.74 अंक टूटा और निफ्टी 294.9 अंक नीचे आ गया।
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कारोबारियों के अनुसार कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने, रुपये में गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया।