सेबी से सांठगांठ के आरोपों का अदाणी शेयर्स पर हो रहा है बुरा असर, औंधें मुंह गिरे अदाणी ग्रुप की 10 कंपनियों के शेयर
सेबी चीफ माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच पर हिंडनबर्ग रिसर्च ने अदाणी समूह के साथ मिलकर हेराफेरी का आरोप लगाया है। जिसके बाद शेयर बाजार में अदाणी समूह के शेयरों के लुढ़कने की खबर पता चली है।
- Written By: अपूर्वा नायक
अदाणी समूह ( सौजन्य : सोशल मीडिया )
नई दिल्ली : अमेरिका की रिसर्च कंपनी ने फिर एक बार अदाणी समूह को आड़े हाथों लेते हुए शनिवार को समूह और सेबी चीफ के सांठगांठ का आरोप लगाते हुए एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद देश के सबसे बड़े बिजनेस ग्रुप में से एक अदाणी समूह के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली है। शेयर मार्केट में इस समूह की लिस्टेड 10 कंपनियों के शेयरों में हफ्ते के पहले ही दिन गिरावट देखने को मिली है।
अदाणी एनर्जी के शेयर में सबसे अधिक 17 प्रतिशत की गिरावट आई। अमेरिकी शोध एवं निवेश कंपंनी हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट के बाद अदाणी समूह के शेयरों में गिरावट आई।
इन शेयरों पर हुआ सबसे ज्यादा असर
बीएसई सेंसेक्स पर सूचीबद्ध अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस में 17 प्रतिशत, अदाणी टोटल गैस में 13.39 प्रतिशत, एनडीटीवी में 11 प्रतिशत और अदाणी पावर में 10.94 प्रतिशत की गिरावट आई। अदाणी ग्रीन एनर्जी के शेयरों में 6.96 प्रतिशत, अदाणी विल्मर में 6.49 प्रतिशत, अदाणी एंटरप्राइजेज में 5.43 प्रतिशत, अदाणी पोर्ट्स में 4.95 प्रतिशत, अंबुजा सीमेंट्स में 2.53 प्रतिशत और एसीसी में 2.42 प्रतिशत की गिरावट आई।
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कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ाने का आरोप
हिंडनबर्ग ने शनिवार देर रात जारी अपनी नई रिपोर्ट में कहा था कि बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की चेयरपर्सन बुच और उनके पति धबल बुच ने बरमूडा तथा मॉरीशस में अस्पष्ट विदेशी कोषों में अघोषित निवेश किया था। उसने कहा कि ये वही कोष हैं जिनका कथित तौर पर विनोद अदाणी ने पैसों की हेराफेरी करने तथा समूह की कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया था। विनोद अदाणी, अदाणी समूह के चेयरपर्सन गौतम अदाणी के बड़े भाई हैं।
2015 में किया गया था निवेश
आरोपों के जवाब में बुच दंपति ने रविवार को एक संयुक्त बयान में कहा कि ये निवेश 2015 में किए गए थे, जो 2017 में सेबी के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में उनकी नियुक्ति तथा मार्च 2022 में चेयरपर्सन के रूप में उनकी पदोन्नति से काफी पहले था। ये निवेश ‘‘ सिंगापुर में रहने के दौरान निजी तौर पर आम नागरिक की हैसियत से ” किए गए थे। सेबी में उनकी नियुक्ति के बाद ये कोष ‘‘निष्क्रिय” हो गए।
( एजेंसी इनपुट के साथ )
