Share Market में महाकोहराम: युद्ध के चलते सेंसेक्स 2743 और निफ्टी 519 अंक गिरावट के साथ खुले

Share Market Crash: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में कोहराम मच गया। ईरान-इजरायल युद्ध के चलते सेंसेक्स 2743 अंक और निफ्टी 519 अंक टूटकर खुले, जिससे निवेशकों को तगड़ा झटका लगा।
Share Market Crash 2026: Sensex Plunges 2743 Points Amid Iran-Israel-US War Crisis
भारतीय शेयर बाजार लाल निशान पल (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Impact Of Iran Israel War On Indian Share Market: आज सुबह जैसे ही बाजार खुला, हर तरफ केवल बिकवाली का शोर सुनाई दिया और स्क्रीन पर लाल निशान ही नजर आने लगा। ईरान और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने भारतीय निवेशकों के दिलों में दहशत पैदा कर दी जिससे बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। युद्ध की इस आग ने न केवल सेंसेक्स और निफ्टी को डुबोया बल्कि आम जनता के लिए महंगाई बढ़ने का नया डर भी पैदा कर दिया है। यह एक ऐसी सुबह थी जब बाजार के हर छोटे-बड़े निवेशक की नजरें केवल युद्ध की खबरों और अपने गिरते पोर्टफोलियो पर टिकी हुई थीं।

बाजार की ऐतिहासिक गिरावट

सोमवार की यह सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए किसी भयानक सपने से कम नहीं थी क्योंकि बाजार खुलते ही चारों तरफ भारी बिकवाली शुरू हो गई। BSE का सेंसेक्स 2743 अंकों की भारी गिरावट के साथ 78543 के स्तर पर खुला जिससे निवेशकों के खरबों रुपये पल भर में साफ हो गए। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 519 अंक नीचे 24659 पर खुला और रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 91 पर पहुंच गया।

युद्ध का गहरा असर

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मध्य पूर्व में तनाव और अधिक बढ़ गया है जिसने वैश्विक बाजारों को हिलाकर रख दिया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता का असर न केवल भारत में बल्कि अमेरिका और एशिया के अन्य बड़े बाजारों जैसे जापान के निक्केई पर भी साफ देखा गया। निवेशकों ने जोखिम भरे शेयरों से अपना पैसा निकालकर सोने और चांदी जैसी सुरक्षित जगहों पर निवेश करना शुरू कर दिया है जिससे उनकी कीमतें काफी बढ़ी हैं।

तेल की बढ़ती कीमतें

ईरान और इजरायल के बीच सैन्य संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 7 प्रतिशत से ज्यादा का उछाल आया है जो आम आदमी के बजट को बिगाड़ सकता है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 7.60 प्रतिशत बढ़कर 78.41 डॉलर प्रति बैरल हो गई है जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों ने चिंता बढ़ा दी है। आपूर्ति में बाधा आने की आशंका ने वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों को महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है जो आगे चलकर महंगाई को बढ़ावा देगा।

आर्थिक आंकड़ों की झलक

भले ही आज बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई हो लेकिन भारत के विकास दर के आंकड़े इस मुश्किल समय में भी उम्मीद की एक नई किरण जगाते हैं। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही है जो पिछली समान अवधि के 7.4 प्रतिशत के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन को दिखाती है। इसके साथ ही फरवरी का GST कलेक्शन भी 1.83 लाख करोड़ रुपये रहा है जो देश की मजबूत आंतरिक आर्थिक स्थिति और बेहतर कर प्रबंधन को स्पष्ट करता है।

निवेशकों के लिए सलाह

बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध की स्थिति में निवेशकों को धैर्य से काम लेना चाहिए और बिना सोचे-समझे किसी भी शेयर को नहीं बेचना चाहिए। आने वाले समय में बाजार की चाल काफी हद तक मध्य पूर्व के युद्ध और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी इसलिए सावधानी बरतना ही सबसे सही विकल्प है। यह समय पोर्टफोलियो की समीक्षा करने का है न कि डर में आकर गलत फैसले लेने का क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति अब भी मजबूत है।

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