Real Estate : रेसिडेंशियल कीमतों में आएगा जबरदस्त उछाल, ट्रेड वॉर के कारण बढ़ सकती है रियल एस्टेट इंडस्ट्री की चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, इन करेक्शन के बाद, वर्तमान और भविष्य दोनों ही में लिए सेंटीमेंट आशावादी बनी हुई है, जो इस सेक्टर में लंबी अवधि में उम्मीदों में निरंतर विश्वास को दर्शाती है।
- Written By: अपूर्वा नायक
रियल एस्टेट सेक्टर (सौ. सोशल मीडिया )
नई दिल्ली : हर किसी का सबसे बड़ा सपना ये होता है कि उसका खुदका घर हो। ऐसे में अगर आप भी अपने सपनों का घर खरीदने के बारे में सोच रहे हैं, तो ज्यादा कीमत देने के लिए तैयार रहिए। क्योंकि रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतों में तेजी आने का सिलसिला जारी रह सकता है। साथ ही महंगे घरों के बाद भी इसका कोई असर सेल्स पर नहीं होगा। रियल एस्टेट सेक्टर की ओर से नए हाउजिंग प्रोजेक्ट्स लॉन्चिंग का सिलसिला आगे भी जारी रहने वाला है।
साल 2024 की चौथी तिमाही अक्टूबर से दिसंबर महीने वाली तिमाही के लिए नाइट फ्रैंक इंडिया- नारेडको रियल एस्टेट सेंटीमेंट इंडेक्स के द्वारा जारी किया गया है। इस रिपोर्ट में ग्लोबली बदलते इकोनॉमिक कंडीशन के साथ स्टेकहोल्डर्स में इकोनॉमिक ग्रोथ की चिंताओं को लेकर रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े स्टेकहोल्डर्स में भी चिंता देखी जा रही है।
नाइट फ्रैंक इंडिया-नारेडको रियल एस्टेट सेंटीमेंट इंडेक्स में मौजूदा और भविष्य के लिए सेंटीमेंट उम्मीद से बेहतर है, लेकिन पिछले तिमाही की तुलना सेंटीमेंट कमजोर हुआ है। साल 2024 की चौथी तिमाही में करेंट सेंटीमेंट स्कोर घटकर 59 अंकों पर आ गया है, जो कि तीसरी तिमाही में 64 था। साथ ही भविष्य के लिए सेंटीमेंट स्कोर भी घटकर 59 अंकों पर आ गया है, जो पिछले तिमाही में 67 अंक था। रिपोर्ट के अनुसार, इन करेक्शन के बाद, वर्तमान और भविष्य दोनों ही में लिए सेंटीमेंट आशावादी बनी हुई है, जो इस सेक्टर में लंबी अवधि में उम्मीदों में निरंतर विश्वास को दर्शाती है।
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नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा है कि रियल एस्टेट सेंटीमेंट इंडेक्स आशावादी दायरे में रहते हुए भी बेहद सावधान है। जियो पॉलिटिकल कंडीशन में तेजी से बदलाव और डोमेस्टिक इकोनॉमिक कंडीशन के ऐसा हो रहा है। उन्होंने कहा है कि ग्लोबल इकोनॉमिकल पॉलिसी में बदलाव, स्पेशली अमेरिकी टैरिफ सिस्टम में बदलाव, साथ ही डोमेस्टिक डेव्हलप्मेंट में मंदी ने रियल एस्टेट सेक्टर को ज्यादा अलर्ट रुख अपनाने के लिए मजबूर हो रही हैं। आने वाली तिमाहियों में, डेवलपर्स और इंवेस्टर्स से वेटिंग और निगरानी का नजरिया बनाए रखने की उम्मीद है, जिसका लक्ष्य पिछले कुछ सालों में इस सेक्टर द्वारा बनायी गई रफ्तार को बनाए रखना है।
