कागज नहीं अब आपके हाथों में होंगे प्लास्टिक के नोट! फटने-गलने की भी कोई टेंशन नहीं, RBI बना रहा ये खास प्लान

Plastic Notes: आरबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 23.8 अरब मूल्य के भारतीय नोट को नष्ट किया गया, जो पिछले वर्ष 21.24 अरब की तुलना में 12.3 प्रतिशत अधिक है।
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कॉन्सेप्ट फोटो, (सोर्स- AI)
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RBI Planing to Launch Plastic Notes: भारतीय रुपये के नोटों को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। देश में लगातार नोटों की बढ़ती मांग को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक प्लास्टिक या पॉलीमर के नोट छापने की योजना पर विचार कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के दावे के अनुसार, पटना और मुंबई में हुई आरबीआई की पिछली दो बोर्ड बैठकों में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई है।

पॉलिमर नोटों की टिकाऊपन और कम उत्पादन लगात के कारण यह निर्णय लिया जा रहा है। ऐसी संभावना है कि आम जनता के लिए प्लास्टिक नोटों के इस्तेमाल का पायलट प्रोजेक्ट जल्द ही शुरू किया जा सकता है।

क्यों प्लास्टिक नोट लाने जा रहा RBI?

भारतीय रिजर्व बैंक के इस फैसले के पीछे मुख्य कारण कम लागतर और नोटों का ज्यादा टिकाऊपन है। आरबीआई के मुताबिक, पॉलिमर नोटों की उत्पादन लागत वर्तमान में चल रहे कागज के नोटों की तुलना में काफी कम है। इसके अलावा, भारत टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काफी आगे बढ़ चुका है और देश के एटीएम को इन प्लास्टिक नोटों को आसानी से निकालने के लिए अपग्रेड किया जाएगा।

वित्त वर्ष 2024-25 में कितने नोट नष्ट हुए?

आरबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 23.8 अरब मूल्य के भारतीय नोट को नष्ट किया गया, जो पिछले वर्ष 21.24 अरब की तुलना में 12.3 प्रतिशत अधिक है। इनमें सबसे अधिक संख्या 500 रुपये और 100 रुपये के नोटों की रही थी। इतनी बड़ी मात्रा में पुराने नोटों को नष्ट करना और फिर नए नोट छापना सरकारी खर्च पर भारी बोझ डालता है। वित्त वर्ष 2025-26 में नोट छापने की लागत 6,372.8 करोड़ रुपये थी, जो पिछले वर्ष 5,101.4 करोड़ की तुलना में काफी अधिक है। प्लास्टिक नोटों की शुरुआत से इस खर्च में काफी कमी आएगी।

डिजिटल पेमेंट के बावजूद बढ़ी कैश की मांग

एक तरफ देश में डिजिटल पेमेंट काफी तेज से बढ़ रहे हैं। लेकिन, दूसरी ओर कैश की मांग में कोई भी कमी नजर नहीं आ रही है। 15 मई तक, मार्केट में कुल नकदी (सीआईसी) 11.5 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 42.86 लाख करोड़ के हाई लेवल पर पहुंच गई। छोटे नोटों ( 10 और 20 रुपये) की मांग अधिक होने के बावजदू, कुल सीआईसी में उनकी हिस्सेदारी क्रमश: 0.7 प्रतिशत और 0.8 प्रतिशत है। सरकार ने सिक्कों को बढ़ावा देने का प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है।

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