सस्ता हो जाएगा होम लोन, RBI रेपो रेट में कर सकता है बदलाव; रिपोर्ट में दावा

Repo Rate: हाल में जारी खुदरा महंगाई के आंकड़ों में आई गिरावट के बाद से उम्मीद की जा रही है कि आरबीआई आने वाले समय में रेपो रेट में कुछ बदलाव कर सकता है। 2025 में अब तक इसमें तीन बार कटौती हुई है।
RBI Governer On Repo Rate Cut
संजय मल्होत्रा, (गवर्नर, RBI)
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RBI Repo Rate: घर खरीदारों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। आने वाले समय में लोन के ईएमआई (EMI) के और भी सस्ते होने के अनुमान है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) रेपो रेट में फिर से कटौती कर सकता है। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में उम्मीद जताई गई है कि दिसंबर महीने में आरबीआई की होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट (bps) की कटौती हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो 2025 के आखिरी तक रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर आ जाएगी। हाल में जारी जून महीने के महंगाई दर में आई कमी को देखते हुए अगली दो मौद्रिक नीति समिति की बैठकों में सेंट्रल बैक रेपो रेट में बदलाव का फैसला कर सकता है।

HSBC ग्लोबल रिसर्च की रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, अगस्त और अक्टूबर की बैठकों में रेपो रेट में किसी भी तरह के बदलाव को लेकर अनुमान नहीं लगाए गए हैं। हालांकि, रिपोर्ट का मानना है कि आरबीआई दिसंबर की बैठक में ब्याज दरों 25 बेसिस पॉइंट की कटौती करेगा।

मई के मुकाबले जून में कम रही खुदरा महंगाई

जून में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई दर में मई के 2.8 प्रतिशत के मुकाबले जून में 2.1 प्रतिशत रही। महंगाई में यह गिरावट खाद्य पदार्थों के कीमतों के चलते आई है, जिसमें और कमी आने की उम्मीद है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2025 की दूसरे क्वार्टर जुलाई से सितंबर में औसत महंगाई 2.7 फीसदी के लेवल पर रहेगी, जो आरबीआई के 2.9 प्रतिशत के अनुमान से कम है।

RBI गवर्नर ने कटौती के दिए संकेत

मंगलवार को न्यूज चैनल को दिए एक इंटरव्यू में रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट पर बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि कम होती महंगाई और विकास में मंदी दोनों ही संभावित रूप से रेपो रेट में कटौती के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं। यानी कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की अगली बैठकों में रेपो रेट को लेकर जो भी फैसला लिया जाएगा, वह महंगाई और आर्थिक विकास पर निर्भर करेगा। आरबीआई ने इस साल के फरवरी में और फिर अप्रैल में रेपो रेट में 0.25 बेसिस पॉइंट की कटौती की थी। इससे यह कम होकर 6.00 परसेंट पर पहुंच गया था। इसके बाद फिर जून में 0.50 बेसिस पॉइंट की कटौती हुई, जिसके बाद रेपो रेट 6.00 फीसदी से घटकर 5.50 फीसदी पर आ गई है।

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