कम होने वाली है आपके लोन की EMI, चौथी बार रेपो रेट में कटौती कर सकता है RBI; कल आखिरी फैसला

RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक ने इस वर्ष अब तक रेपो रेट में 3 बार कटौती की है। RBI ने फरवरी 2025 में रेपो रेट में 0.25% की कटौती की थी, जिसके बाद रेपो रेट 6.50% से 6.25% हो गया था।
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आरबीआई (सौ. सोशल मीडिया )
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RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी-पॉलिसी कमेटी की बैठक आरबीआई एमपीसी की बैठक 3 दिसंबर को शुरू हुई और कल यानी 5 दिंसबर तक चलेगी। कल सुबह लगभग 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा नतीजों की घोषणा करेंगे। कार, होम लोन लेने वालों को अब बेसब्री से इंतजार है कि MPC के कल के फैसले का काफी बेसब्री से इंतजार हैं। अब देखने होगा कि क्या कल आरबीआई रेपो रेट में बदलाव करता है या फिर रेपो रेट को पहली की ही तरह 5.50% पर स्थिर रखता है।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषकों को ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश दिख रही है। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि हमें दिसंबर में रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती की उम्मीद है। हालांकि विकास दर मजबूत बनी हुई है, अक्टूबर में खुदरा महंगाई में उल्लेखनीय गिरावट ने इस समायोजन की अतिरिक्त गुंजाइश पैदा कर दी है।

ब्याज दरों में तीन बार कटौती कर चुका है RBI

RBI ने इस वर्ष अब तक रेपो रेट में 3 बार कटौती की है। RBI ने फरवरी 2025 में रेपो रेट में 0.25% की कटौती की थी, जिसके बाद रेपो रेट 6.50% से 6.25% हो गया था। अप्रैल 2025 में रेपो रेट में दोबारा 0.25% की कटौती की गई, जिसके बाद रेपो रेट 6.25% से 6% हो गया था। वहीं, जून 2025 में RBI ने रेपो रेट में 0.50% की कटौती की थी, जिसके बाद रेपो रेट 6% से 5.50% हो गया था।

RBI ने अगस्त 2025 में रेपो रेट में कोई कटौती नहीं की। अक्टूबर में भी RBI ने अपने रेपो रेट में कोई कटौती नहीं की है और रेपो रेट में 5.50 प्रतिशत पर स्थिर रखा है। ऐसे में अब देखना होगा कि क्या RBI दिसंबर 2025 में रेपो रेट में बदलाव करता है या नहीं।

रेपो रेट में 25-50 bps की कटौती की मांग

भारतीय युवा शक्ति ट्रस्ट के संस्थापक लक्ष्मी वेंकटरमन वेंकटेशन ने कहा कि पिछले एक साल में अभी का रेपो रेट 5.5%, 6.5% से काफी कम हो गया है। अक्टूबर में महंगाई एक दशक में अपने सबसे निचले लेवल पर सिर्फ 0.25% थी, और होलसेल कीमतों में 1.21% की गिरावट आई है। माइक्रो और छोटे बिजनेस को मिलने वाले लगभग 70% लोन सीधे रेपो रेट से जुड़े होते हैं, इसलिए कम रेट से उनकी उधार लेने की लागत तुरंत कम हो जाती है, बशर्ते बैंक रेट को फ़ाइनल करने के लिए मार्जिन न बढ़ाएं।

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