भारतीय करेंसी (सौ. से सोशल मीडया)
नई दिल्ली : फिलहाल देश की सबसे बड़ी मुद्रा के रूप में 500 के नोटों पर सर्वाधिक जुल्म होता दिखायी दे रहा है। इन नोटों के कटने-फटने और सड़े-गले होने पर बाजार इनसे अक्सर मुंह फेर लेता है। सर्वाधिक लिखापढ़ी भी इन्हीं 500 की नोटों पर की जा रही है। इस साल अप्रैल से नवंबर तक के आंकड़े को देखा जाए तो परिणाम काफी चौंकाने वाले दिख रहे हैं। इस साल में 8 महीने के दौरान देशभर से 1642 करोड़ नोट करेंसी नोट चेस्ट में वापस हुए हैं जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 1310 करोड़ अधिक है। इस बार 332 करोड़ नोट कटे-फटे और सड़े गले रूप में वापस कराए जा रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, रिजर्व बैंक ने 500 के 611 करोड़ नोटों को चलन से ही बाहर करने का फैसला किया है। पिछले साल इसी अवधि में पूरे देश में 500 के 409 करोड़ नोट बाजार से हटाए गए थे। यानी इस बार के आंकड़ों में 202 करोड़ नोटों का इजाफा हुआ है। इसका खुलासा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में हुआ है।
रिजर्व बैंक से मिले जानकारी के अनुसार देश की नंबर वन मुद्रा होने के कारण 500 की नोटों का प्रचलन सर्वाधिक है। इसी वजह से ये नोट सबसे ज्यादा खराब भी हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बाजार से बाहर होने वाले नोटों में दूसरे नंबर पर 100 रुपए का नोट है। अप्रैल से नवंबर तक के बीच के आंकड़े को अगर देखा जाए तो पता चलता है कि 100 रुपए के 430 करोड़ नोटों को चलन से बाहर किया गया है। पिछले साल यह आंकड़ा केवल 328 करोड़ था।इसके अतिरिक्त तीसरे नंबर पर खराब होने वाली नोटों में 200 की करेंसी है ।अप्रैल से नवंबर तक के बीच 200 रुपए के 178 करोड़ नोटों को मार्केट से हटाने का प्लान बनाया गया।
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अगर अन्य नोटों की बात की जाए तो 5 रुपए के 2.83 करोड़, 10 रुपए के 144 करोड़, 20 रुपए के 109 करोड़, 50 रुपए के 150 करोड़ नोटों की वापस करायी गई है, जो कि पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक हैं। अप्रैल से लेकर नवंबर तक के बीच केवल 5 रुपए के नोट ही ऐसे हैं जो पिछले साल की तुलना में काम वापस लौटे हैं। इनका प्रचलन में कम होना इनकी वजह बतायी जा रही है।