
2017 में मोदी सरकार ने 92 साल पुरानी रेल बजट परंपरा को किया था खत्म (सोर्स - सोशल मीडिया)
History of Indian Rail Budget: भारत के बजटीय इतिहास में साल 2017 एक बहुत बड़े बदलाव का गवाह बना जब रेल बजट का विलय हुआ। मोदी सरकार ने ब्रिटिश काल से चली आ रही 92 साल पुरानी अलग रेल बजट की परंपरा को हमेशा के लिए खत्म किया। अब रेल बजट को आम बजट के साथ ही 1 फरवरी को संसद के पटल पर पेश किया जाता है।
देश में रेल बजट को अलग से पेश करने की शुरुआत साल 1924 में ब्रिटिश शासन के दौरान की गई थी। तब से लेकर साल 2016 तक हर साल आम बजट से दो दिन पहले रेल मंत्री इसे सदन में पेश करते थे। भारतीय रेल करीब 14 लाख से अधिक लोगों को रोजगार देने वाला देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक उपक्रम है।
रेल बजट को अलग करने की सिफारिश 10 सदस्यीय एक्वोर्थ समिति द्वारा साल 1921 में की गई थी। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री विलियम मिशेल एक्वर्थ की अध्यक्षता वाली इस समिति ने रेलवे के वित्तीय प्रदर्शन में सुधार का सुझाव दिया था। उन्हीं की अनुशंसा के आधार पर 1924 से रेलवे के लिए एक विशेष और स्वतंत्र बजट की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
भारतीय संविधान में कहीं भी स्पष्ट रूप से ‘रेल बजट’ जैसे शब्द का कोई लिखित वर्णन नहीं मिलता है। इसे संविधान के अनुच्छेद 112 और 204 के अंतर्गत ही लोकसभा में धन विधेयक के रूप में पेश किया जाता था। देश में रेल बजट की कार्यवाही का सीधा प्रसारण पहली बार 24 मार्च 1994 को शुरू किया गया था।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के नाम लगातार 6 बार रेल बजट पेश करने का शानदार रिकॉर्ड दर्ज है। वे 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहे और उन्होंने संप्रग सरकार के दौरान यह उपलब्धियां हासिल की थीं। ममता बनर्जी भारत की पहली महिला रेल मंत्री थीं जिन्होंने साल 2002 में देश का रेल बजट प्रस्तुत किया था।
साल 2016 में सुरेश प्रभु वह अंतिम रेल मंत्री बने जिन्होंने संसद में अलग से रेल बजट पेश किया था। अगले ही साल 2017 में केंद्र सरकार ने बजट की तारीख बदलकर 1 फरवरी की और रेल बजट का विलय कर दिया। इस ऐतिहासिक निर्णय के साथ ही रेलवे के वित्तीय सर्वेक्षण को भी अब आम बजट के साथ ही शामिल किया गया है।
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भारत में पहली यात्री ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को मुंबई और ठाणे के बीच सफलतापूर्वक चलाई गई थी। रेलवे ने तकनीकी विकास के साथ 1986 में चाणक्यपुरी स्थित केंद्र से पहली बार कंप्यूटर आरक्षण प्रणाली शुरू की। आज भारतीय रेल नेटवर्क न केवल रोजगार देता है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की एक मजबूत रीढ़ माना जाता है।
Ans: यह परंपरा 10 सदस्यीय एक्वोर्थ समिति की अनुशंसा पर साल 1924 में शुरू की गई थी।
Ans: सुरेश प्रभु वह अंतिम रेल मंत्री थे जिन्होंने साल 2016 में अलग से रेल बजट पेश किया था।
Ans: लालू प्रसाद यादव के नाम लगातार 6 बार (2004-2009) रेल बजट पेश करने का रिकॉर्ड है।
Ans: मोदी सरकार ने 2017 में बजट की तारीख 1 फरवरी करने के साथ 92 साल पुरानी यह परंपरा खत्म की।
Ans: पहली यात्री ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को महाराष्ट्र के मुंबई और ठाणे के बीच चलाई गई थी।






