

नई दिल्ली : हमारे देश में दाल की कीमतें एक बार फिर से बढ़ाने के लिए तैयार हैं। माना जा रहा है कि पिछले 2 सालों की तरह अबकी बार भी दालों की कीमतें बढ़ेंगी। इसका सबसे ज्यादा असर अरहर की दाल पर पड़ने वाला है। जिसका औसत बिक्री मूल करीब 65 रुपए प्रति किलोग्राम तक बढ़ गया है। इसके अलावा मूंग, चना और उड़द की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इन सबमें चने की दाल सबसे कम तेजी से बढ़ी है। हालांकि इस दौरान मसूर की दाल की कीमतों में कमी दर्ज की गई है।
रिजर्व बैंक आफ इंडिया के द्वारा अगस्त माह में खाद्य वस्तुओं की महंगाई के संदर्भ में किए गए आकलन और उसके द्वारा जारी की गई रिपोर्ट को देखें तो पता चलता है कि दालों के साथ-साथ चावल के बिक्री मूल्य में करीब आठ रूपए प्रति ग्राम किलो का ग्राम का इजाफा हुआ है। इससे माना जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनो में यह कीमत और बढ़ेगी। इससे मिडिल क्लास और गरीबों को तगड़ा झटका लगने की उम्मीद है।
ऐसे बढ़ीं हैं कीमतें
रिजर्व बैंक के द्वारा जारी किए गए आंकड़ों में देखे तो अगस्त 2022 में अरहर की दाल की कीमत 105 रुपए थी, जो बढ़कर अगस्त 2024 में 170 रुपए हो गई है। वहीं अगस्त 2022 महीने में उड़द की दाल की कीमत 105 रुपए थी जो बढ़कर 2024 में 115 रुपए हो गई है। मूंग की दाल की कीमत 98 रुपए से बढ़कर 110 रुपए और मसूर की दाल 96 से घटकर 90 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है। वहीं अगर दो प्रमुख अनाजों की कीमतों का अंतर देखें तो पता चलता है कि चावल अगस्त 2022 में 36 रुपए प्रति किलो था अब वह बढ़कर 44 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया है,त जबकि गेहूं की कीमत 29 रुपए से बढ़कर 32 रुपए हो गई है। रिजर्व महीने यह आंकड़े औसत बिक्री मूल्य और प्रति किलोग्राम के रूप में जारी किए हैं।
इस तरह देखा जाए तो बीते दो वर्षों में अरहर दाल सबसे ज्यादा मंहगी हुई है, जिसका औसत बिक्री मूल्य करीब 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ गया है। इसके साथ ही साथ मूंग, उड़द की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। वहीं, चना दाल पर सबसे कम करीब 10 रुपये बढ़े हैं। बीते वर्ष से तुलना की जाए तो जुलाई में इसमें करीब 8.1 प्रतिशत की तेजी आई। इसलिए सरकार ने खुले बाजार में 2325 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गेहूं और 2800 रुपये प्रति क्विंटल चावल बेचने को मंजूरी दे दी है।
आकड़ों को देखें तो पता चलता है कि खरीफ विपणन सीजन 2023- 24 में 524 लाख टन चावल खरीदा गया, जो बीते सीजन के मुकाबले करीब 8 फीसदी कम था। लेकिन जुलाई तक चावल का स्टॉक 473 लाख टन था, जो बीते वर्ष की तुलना में 21 फीसदी अधिक बताया जा रहा है। गेहूं का भी 276 लाख टन का स्टॉक उपलब्ध था, लेकिन मांग के अनुरूप दालों की उपलब्धता सीमित होने की वजह से उनकी कीमतों पर असर देखा जा सकता है।
इसके अलावा बताया जा रहा है कि देश में चने का उत्पादन अच्छा रहा है, जिसकी वजह से उसकी कीमतों में ज्यादा तेजी नहीं आई हैं। बाकी अगस्त 2022 की तुलना में अगस्त 2024 तक दालों की कीमतों में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है।