Driving License : मोदी सरकार का मास्टरप्लान, 3 महीने में नहीं भरा चालान तो कैंसिल होगा लाइसेंस
ये उन सोल्यूशन की सीरीज का हिस्सा हैं, जिन्हें सरकार ने गलत ड्राइवरों पर रोक लगाने के लिए लागू करने की प्लानिंग की है। सरकार ने ये पाया है कि ई-चालान अमाउंट की बमुश्किल 40 प्रतिशत वसूली हुई है।
- Written By: अपूर्वा नायक
ई-चालान (सौ. सोशल मीडिया )
नई दिल्ली : केंद्र में बैठी मोदी सरकार ट्रैफिक चालान नहीं भरने वाले लोगों के लिए एक नया नियम बनाने की तैयारी कर रही है। जो भी लोग 3 महीनों के अंदर अपने ट्रैफिक ई-चालान यानी जुर्माना की राशि का भुगतान नहीं करते हैं, उनके ड्राइविंग लाइसेंस जल्द ही सस्पेंड किए जा सकते हैं। साथ ही जिन लोगों ने एक वित्त वर्ष में 3 चालान जैसे कि रेड सिग्नल तोड़ने या डेंजरस तरीके से गाड़ी चलाने के लिए- जमा कर लिए हैं, उनके लाइसेंस कम से कम 3 महीने के लिए जब्त किए जा सकते हैं।
पेंडिंग चालान पर महंगा होगा इंश्योरेंस
ये उन सोल्यूशन की सीरीज का हिस्सा हैं, जिन्हें सरकार ने गलत ड्राइवरों पर रोक लगाने के लिए लागू करने की प्लानिंग की है। सरकार ने ये पाया है कि ई-चालान अमाउंट की बमुश्किल 40 प्रतिशत वसूली हुई है। इसका बड़े पैमाने पर गैर-अनुपालन होता है। सूत्रों के अनुसार कहा जा रहा है कि सरकार ने हाई इंश्योरेंस प्रीमियम को भी जोड़ने की स्ट्रेटेजी तैयार की है। यदि किसी के पास पिछले वित्त वर्ष से कम से कम 2 लंबित चालान हैं, तो उसके इंश्योरेंस का ज्यादा प्रीमियम देना पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के बाद जानकारी
सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के बाद ये जानकारी तैयार की गई है। इसमें 23 राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम में प्रावधान के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के कार्यान्वयन को इंगित करते हुए अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया है।
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अधिनियम की सेक्शन 136ए में बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट और ट्रैफिक कानूनों के प्रवर्तन को सुनिश्चित करने के लिए स्पीड और सीसीटीवी कैमरे, स्पीड-गन, बॉडीवॉर्न कैमरे और स्वचालित नंबर प्लेट पहचान सिस्टम जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी की तैनाती को विशेष रूप से वर्णित किया गया है।
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दिल्ली में सबसे कम जुर्माना वसूली
कुछ मीडिया रिपोर्ट से ये पता चला है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यातायात नियम उल्लंघन के मामले ज्यादा हैं, उनमें दिल्ली में जुर्माने की वसूली की दर सबसे कम है, जो मुश्किल से 14 प्रतिशत है। उसके बाद कर्नाटक में ये 21 प्रतिशत, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में ये 27 प्रतिशत और ओडिशा में 29 प्रतिशत का स्थान है। राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा उन प्रमुख राज्यों में शामिल हैं, जिन्होंने 62 प्रतिशत से 76 प्रतिशक की वसूली दर दर्ज की है।
