

LPG Import Shift to US: मिडिल ईस्ट में जारी घमासान के बीच भारत ने ईंधन खरीद में बड़ा बदलाव किया है। सरकारी तेल कंपनियों ने अमेरिका से 27.5 लाख टन LPG इंपोर्ट का संयुक्त टेंडर जारी किया है।
वर्ष 2027 के लिए जारी यह टेंडर घरेलू उपभोक्ताओं तक रसोई गैस आपूर्ति बनाए रखने के लिए है। पश्चिम एशिया में तनाव से उपजी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत का यह बड़ा रणनीतिक कदम है।
तीन प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अमेरिका से LPG के लिए हाथ मिलाया है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने यह टेंडर जारी किया है। दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2027 में अमेरिका से कुल 27.5 लाख टन LPG भारत मंगाई जाएगी।
यह पहला मौका है जब भारतीय कंपनियों ने पश्चिम एशिया के बजाय अमेरिका से इतना बड़ा करार किया है। इस टेंडर के तहत 2027 में हर महीने अमेरिका से चार बड़े गैस कैरियर कार्गो भारत आएंगे। प्रत्येक कार्गो की क्षमता 46000 टन होगी, जिसमें प्रोपेन व ब्यूटेन का बराबर मिश्रण रहेगा।
इसके अलावा हर महीने 'फ्री-ऑन-बोर्ड' आधार पर 45,000 टन का एक अतिरिक्त कार्गो भी आएगा। यह संयुक्त टेंडर 22 अक्टूबर तक मान्य रहेगा, जिससे तेल आपूर्ति सुचारू बनी रहे।
तरलीकृत पेट्रोलियम गैस यानी LPG मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का सुरक्षित मिश्रण है। चीन के बाद भारत दुनिया भर में LPG का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में भारत ने कुल 2.19 करोड़ टन LPG इंपोर्ट किया था।
इस कुल आयात में से लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा अकेले मिडिल ईस्ट के देशों से खरीदा गया था। मिडिल ईस्ट से आने वाली यह गैस भारत की कुल घरेलू LPG खपत का लगभग 66 प्रतिशत थी। लेकिन फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल और ईरान संघर्ष छिड़ने से आपूर्ति प्रभावित हुई।
मार्च में सप्लाई बाधित होने पर सरकार को पेट्रोकेमिकल उद्योगों से गैस घरेलू सिलेंडरों में भेजनी पड़ी। इस कदम से देश भर के घरों में खाना पकाने की गैस की किल्लत को नियंत्रित किया गया।
पश्चिम एशिया में ईरान युद्ध के कारण गैस आपूर्ति श्रृंखला में भारी अनिश्चितता पैदा हुई। इसी का परिणाम रहा कि पिछले एक दशक में पहली बार भारत में LPG ग्राहकों की संख्या घटी है। अप्रैल से अगस्त के बीच देश भर में लगभग 62 लाख परिवारों ने अपने LPG कनेक्शन छोड़ दिए।
सप्लाई में कमी के चलते तेल कंपनियों को नए रसोई गैस कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया रोकनी पड़ी। इसके साथ ही मौजूदा ग्राहकों की जांच-पड़ताल कडी होने के चलते भी कनेक्शनों की संख्या में कमी आई। इसी संकट से सबक लेते हुए भारतीय कंपनियों ने अमेरिका से सीधे खरीद का टेंडर निकाला है।
मिडिल ईस्ट पर निर्भरता घटाकर अमेरिका का रुख करना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा। 2027 से शुरू होने वाली इस सप्लाई से देश के करोड़ों परिवारों को निर्बाध गैस मिलती रहेगी।