नागपुर में गहराया एलपीजी संकट: एजेंसियों पर उमड़ी भीड़, डर के मारे समय से पहले बुकिंग की होड़

Nagpur LPG Crisis: नागपुर में एलपीजी संकट गहराया! डिमांड 22,500 से बढ़कर 50,000 हुई, जिससे वेटिंग पीरियड 7 दिन तक पहुंचा। कमर्शियल सप्लाई रुकने से कई रेस्टोरेंट और उद्योग बंद होने की कगार पर हैं।
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एलपीजी गैस सिलेंडर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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LPG Crisis In Nagpur: नागपुर शहर पिछले 6-7 दिनों से एलपीजी संकट से जूझ रहा है जो हर गुजरते दिन के साथ और गहराता जा रहा है। इसका असर घरेलू और कमर्शियल दोनों तरह से बुरी तरह पड़ रहा है। शहर की कुछ स्थानीय गैस एजेंसियों और गोदामों पर अफरा-तफरी का माहौल चल रहा है जहां ग्राहक रोज ही सिलेंडर रिफिल करवाने के लिए कोशिशें करते नजर आ रहे हैं। वहीं गैस एजेंसियों को भी डिमांड के अनुसार सिलेंडर की सप्लाई नहीं हो पा रही है। किसी एजेंसी को 4,000 सिलेंडर की जरूरत है तो उसे 2,000 ही मिल रहे हैं। इसके चलते भी संकट बढ़ता जा रहा है। आगे सिलेंडर मिलेगा कि नहीं इस डर के चलते बुकिंग डबल हो गई है। इस समय रोज 50,000 सिलेंडर की डिमांड हो रही है।

गड़बड़ा रहा डीलर्स नेटवर्क

घरेलू श्रेणी में ग्राहकों को सिलेंडर रिफिल करवाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मांग में अचानक आई तेजी को संभालने के लिए ज्यादातर गैस एजेंसियों के मैन्युअल बुकिंग सिस्टम पर लौटने के बावजूद एलपीजी रिफिल के लिए इंतजार का समय तेजी से बढ़कर 6 से 7 दिन हो गया है। नागपुर नगर निगम की सीमा के भीतर लगभग 45 स्थानीय गैस एजेंसियां ​​(डीलर्स) वितरण नेटवर्क को संभाल रही हैं लेकिन जिस तरह डिमांड बढ़ी है उससे नेटवर्क गड़बड़ा रहा है। आम हालात में ये एजेंसियां ​​मिलकर रोज लगभग 22,500 घरेलू श्रेणी के सिलेंडर सप्लाई करती हैं।

बताया जा रहा है कि नागरिकों में बढ़ते डर और घबराहट के कारण रोज की मांग दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है और हाल ही में यह 50,000 के आंकड़े को पार कर गई है। दिलचस्प बात यह है कि कई ग्राहक तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा तय की गई अनिवार्य 25 दिन की समय सीमा पूरी होने से काफी पहले ही अपना अगला रिफिल बुक करने की कोशिश कर रहे हैं। समय से पहले बुकिंग करने की इस होड़ ने पूरे नागपुर शहर में भारी अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया है। घबराए हुए ग्राहक गैस पाने की बेताब कोशिश में अक्सर स्थानीय गैस एजेंसियों और स्टोरेज गोदामों के बाहर भीड़ लगाते नजर आ रहे हैं।

कामकाज बंद करने को हुए मजबूर

कमर्शियल श्रेणी के एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी शहर की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर डाल रही है। इसके दूरगामी प्रभाव शहर के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में साफ तौर पर देखे जा सकते हैं। कई रेस्टोरेंट, भोजनालय और सड़क किनारे के ढाबों को कमर्शियल गैस सिलेंडरों की अनुपलब्धता के कारण अपने रोज के कामकाज को पूरी तरह से बंद करने पर मजबूर होना पड़ा है। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र पर भी इसका असर उतना ही चिंताजनक है। विभिन्न मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स को अपने कामकाज में भारी कटौती करने पर मजबूर होना पड़ा है।

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