Jal Jeevan Mission 2.0: ओएंडएम क्षेत्र में 3 लाख करोड़ के नए अवसर, 2028 तक हर घर नल का लक्ष्य
Water Mission Update: जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ऑपरेशन और मेंटेनेंस में 3 लाख करोड़ के अवसर मिलेंगे। सरकार ने 100% नल कनेक्शन का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया है। अब फोकस गुणवत्ता और सर्विस पर है।
- Written By: प्रिया सिंह
जल जीवन मिशन 2.0 (सोर्स-सोशल मीडिया)
Jal Jeevan Mission 2.0 Opportunities: केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के दूसरे चरण की शुरुआत के साथ ही ग्रामीण भारत में पानी की आपूर्ति को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। इस नई योजना के तहत अब केवल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर ही नहीं, बल्कि उसके रख-रखाव और बेहतर सेवा प्रदान करने पर पूरा ध्यान दिया जाएगा। जल जीवन मिशन 2.0 के अवसर के माध्यम से अगले कुछ वर्षों में देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिलेंगे। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना और ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता को और अधिक बेहतर बनाना है।
बजट और ओएंडएम
आईसीआरए की रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ऑपरेशन और मेंटेनेंस क्षेत्र में लगभग 3 लाख करोड़ रुपये के नए अवसर पैदा होने वाले हैं। सरकार का अब पूरा ध्यान केवल पाइपलाइन बिछाने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि बनी हुई व्यवस्था को लंबे समय तक चालू रखने और प्रबंधित करने पर होगा। इस महत्वाकांक्षी योजना का कुल बजट अब बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है जो ग्रामीण विकास की दिशा में एक बहुत बड़ी राशि है।
समय सीमा और लक्ष्य
सरकार ने 19.4 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक 100 प्रतिशत नल कनेक्शन पहुंचाने की अपनी पुरानी समयसीमा को 2024 से बढ़ाकर अब दिसंबर 2028 कर दिया है। अगस्त 2019 में शुरू हुए इस मिशन ने अब तक शानदार प्रगति की है और नल कनेक्शन वाले घरों की संख्या 323.6 लाख से बढ़कर 1,582.3 लाख हो गई है। फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण भारत में पानी का कवरेज 81 प्रतिशत से ज्यादा हो चुका है जो एक बहुत ही सराहनीय उपलब्धि मानी जा रही है।
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कंपनियों को फायदा
इस मिशन के दूसरे चरण से इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन यानी ईपीसी सेक्टर के साथ-साथ पीवीसी और एचडीपीई पाइप बनाने वाली कंपनियों को बड़ा लाभ मिलेगा। रिपोर्ट के मुताबिक जिन कंपनियों के पास मजबूत तकनीकी आधार और सर्विस नेटवर्क उपलब्ध है उन्हें इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा मिलने की पूरी उम्मीद है। परियोजनाओं के बजट में बढ़ोतरी होने से काम करने वाली कंपनियों को मिलने वाले भुगतान की स्थिति में भी काफी सुधार होने की संभावना जताई गई है।
भुगतान में सुधार
वर्तमान में कई राज्यों में ठेकेदारों और कंपनियों के भुगतान में 6 महीने से ज्यादा की देरी हो रही है जिसे कम करने के लिए सरकार गंभीर प्रयास कर रही है। सितंबर 2026 तक इस भुगतान की समयसीमा को घटाकर 60 दिन से भी कम करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि कार्य की गति और गुणवत्ता दोनों बनी रहे। भुगतान व्यवस्था में इस सुधार से बाजार में तरलता बढ़ेगी और छोटी-बड़ी सभी कंपनियों को समय पर अपने प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए आर्थिक मदद मिलेगी।
डिजिटल निगरानी
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत अब पानी की नियमित सप्लाई और उसकी शुद्धता की निगरानी के लिए डिजिटल सिस्टम और सुजलम भारत प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। तकनीक के इस समावेश से अब किसी भी क्षेत्र में होने वाली पानी की किल्लत या गुणवत्ता की खराबी का तुरंत पता लगाया जा सकेगा और सुधार संभव होगा। सरकार का उद्देश्य अब इसे केवल एक प्रोजेक्ट के रूप में नहीं बल्कि एक स्थायी सार्वजनिक सेवा मॉडल के रूप में विकसित करना है जो सालों साल तक चलता रहे।
पंचायतों की भूमिका
इस मिशन की सफलता के लिए अब ग्राम पंचायतों और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और जिम्मेदार बनाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने से पानी की बर्बादी रुकेगी और ग्रामीण लोग खुद अपनी जल आपूर्ति व्यवस्था की देख-रेख कर सकेंगे। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2025-26 के बाद खर्च और बजट के अंतर को कम करना एक बड़ी चुनौती है जिसके लिए अब गुणवत्ता और ऊर्जा दक्षता पर जोर है।
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योजना का विकास
जल जीवन मिशन की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी और तब से लेकर अब तक नल कनेक्शन वाले घरों की संख्या लगभग 5 गुना तक बढ़ गई है। प्रारंभिक चुनौतियों के बावजूद सरकार ने करोड़ों परिवारों तक साफ पानी पहुंचाने का अपना वादा निभाया है और अब इसे अगले स्तर पर ले जाया जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि फरवरी 2026 तक इस मिशन ने ग्रामीण भारत के बड़े हिस्से को कवर कर लिया है जो स्वास्थ्य और स्वच्छता की दिशा में बड़ा कदम है।
