

Highlights:
इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड ने गुरुवार को दूसरी तिमाही के नतीजे घोषित किए।
इस दौरान कंपनी का शुद्ध घाटा कम होकर 1,879 करोड़ रुपये हो गया है।
कंपनी की ऑपरेशंस से कमाई सालाना आधार पर 25.9 प्रतिशत बढ़ गई है।
Indigo Quarter 2 Result: भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के नतीजे घोषित किए। इस दौरान कंपनी का शुद्ध घाटा कम होकर 1,879 करोड़ रुपये हो गया है।
कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि तिमाही के दौरान उसका समेकित शुद्ध घाटा 1,879 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 2,582 करोड़ रुपये था।
कंपनी की ऑपरेशंस से कमाई सालाना आधार पर 25.9 प्रतिशत बढ़कर 23,364 करोड़ रुपये हो गई है, जबकि एक साल पहले की समान तिमाही में यह 18,555 करोड़ रुपये थी। इस वृद्धि में मजबूत मांग और राजस्व बढ़ाने के लिए अपनाई गई रणनीतियों का योगदान रहा।
परिचालन के मोर्चे पर इंडिगो की ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन (Depreciation) और परिशोधन से पहले की आय (ईबीआईटीडीए) में तेज सुधार हुआ। यह एक साल पहले के 579 करोड़ रुपये से 229 प्रतिशत बढ़कर 1,908 करोड़ रुपये हो गया है।
कंपनी का ईबीआईटीडीए (EBITDA) मार्जिन भी पिछले साल की समान तिमाही के 3.1 प्रतिशत से बढ़कर 8.2 प्रतिशत हो गया। हालांकि, ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन, परिशोधन और किराये से पहले की आय (ईबीआईटीडीएआर), जो एयरलाइंस की लाभप्रदता का एक प्रमुख मापदंड है, सालाना आधार पर 3 प्रतिशत घटकर 3,667 करोड़ रुपये रह गई।
पिछले साल की समान तिमाही में यह 3,792 करोड़ रुपये था। इससे कंपनी का ईबीआईटीडीएआर मार्जिन एक साल पहले के 20.4 प्रतिशत से घटकर 15.7 प्रतिशत रह गया।
कंपनी के प्रदर्शन पर इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विली वॉल्श ने कहा कि सितंबर तिमाही आमतौर पर कारोबार के लिहाज से कमजोर रहती है। इस बार ईंधन की असाधारण रूप से ऊंची कीमतों और जारी भू-राजनीतिक व्यवधानों का भी असर पड़ा। वॉल्श ने कहा कि हम भविष्य के लिए निवेश जारी रखते हुए निकट भविष्य की चुनौतियों से निपटने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
उन्होंने आगे बताया कि भारत में एविएशन सेक्टर की लॉन्गटर्म संभावनाएं बेहद आकर्षक बनी हुई हैं। हमारी प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं, सुरक्षित और भरोसेमंद परिचालन, लागत पर सख्त नियंत्रण और ऐसा अनुशासित विस्तार, जिससे टिकाऊ मूल्य का सृजन हो।