इतिहास रचने की ओर भारतीय अर्थव्यवस्था, विदेशी मुद्रा भंडार पहुंचा ‘ऑल-टाइम हाई’ पर
मध्य पूर्व के तनाव के बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.885 अरब डॉलर बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है। जानिए क्या है भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इसके मायने।
- Written By: नवभारत डेस्क | Edited By: उज्जवल सिन्हा
आरबीआई (फोटो-सोशल मीडिया)
India Foreign Exchange Reserves Record: मध्य पूर्व के अस्थिर भौगोलिक और राजनीतिक हालातों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती का एक नया उदाहरण पेश किया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा शुक्रवार को जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 27 फरवरी, 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.885 अरब डॉलर की भारी बढ़त के साथ 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर (All-Time High) पर पहुंच गया है। इससे पहले फरवरी के मध्य में यह भंडार 725.727 अरब डॉलर के पिछले रिकॉर्ड स्तर पर था।
गोल्ड और फॉरेन करेंसी एसेट्स में उछाल
विदेशी मुद्रा भंडार में इस ऐतिहासिक उछाल के पीछे मुख्य रूप से इसके प्रमुख घटकों में हुई वृद्धि है। डेटा के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे अहम हिस्सा ‘गोल्ड रिजर्व’ है, जिसकी वैल्यू 4.141 अरब डॉलर बढ़कर 131.630 अरब डॉलर हो गई है। इसके अलावा, भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा ‘फॉरेन करेंसी एसेट्स’ (FCA) भी 56.1 करोड़ डॉलर की वृद्धि के साथ 573.125 अरब डॉलर पर पहुँच गया है। उल्लेखनीय है कि एफसीए में डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी वैश्विक मुद्राएं शामिल होती हैं, जिनकी वैल्यू को डॉलर के संदर्भ में आंका जाता है।
RBI का है दावा
आरबीआई के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार के अन्य हिस्सों में भी सुधार देखा गया है। 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में एसडीआर (SDR) की वैल्यू 2.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.866 अरब डॉलर हो गई है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत की ‘रिजर्व पॉजिशन’ भी 15.8 करोड़ डॉलर की बढ़त के साथ 4.873 अरब डॉलर पर पहुंच गई है।
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अर्थव्यवस्था के लिए क्यों है यह जरूरी?
किसी भी देश का विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक सेहत का सबसे बड़ा पैमाना माना जाता है। यह न केवल देश की साख को मजबूत करता है, बल्कि मुद्रा की विनिमय दर (Exchange Rate) को स्थिर रखने में केंद्रीय बैंक को बड़ी शक्ति प्रदान करता है। यदि कभी डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो आरबीआई इसी भंडार का उपयोग कर रुपये को अधिक गिरने से बचा सकता है और बाजार में स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है। बढ़ता हुआ विदेशी मुद्रा भंडार इस बात का भी प्रमाण है कि देश में विदेशी मुद्रा (डॉलर) की आवक प्रचुर मात्रा में बनी हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुगम होता है और देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक झटकों को सहने के लिए अधिक सक्षम बनती है।
