शेयर बाजार में ब्लैक मंडे! सेंसेक्स 75,000 के नीचे फिसला, चौतरफा बिकवाली से निवेशकों के डूबे अरबों रुपये
Stock Market: कमजोर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण सोमवार, 18 मई को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे लुढ़क गए।
- Written By: प्रतीक पाण्डेय
शेयर मार्केट में भारी गिरावट (सोर्स-सोशल मीडिया)
Share Market Update: हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। वैश्विक बाजारों से मिले निराशाजनक संकेतों के चलते सोमवार सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों ने भारी बिकवाली शुरू कर दी, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में चले गए।
सुबह 9:18 बजे के आंकड़ों के अनुसार, सेंसेक्स 851 अंक (1.08%) की कमजोरी के साथ 74,422 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह, निफ्टी भी 246 अंक (1.04%) गिरकर 23,392 पर आ गया। बाजार में यह गिरावट इतनी व्यापक है कि निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी रियल्टी जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। इसके अलावा ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज और पीएसयू बैंक जैसे इंडेक्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।
स्मॉलकैप और मिडकैप का बुरा हाल
बड़े शेयरों के साथ-साथ छोटे और मझोले शेयरों में भी बिकवाली का जबरदस्त दबाव देखा जा रहा है। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.38 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ खुले। सेंसेक्स के शेयरों में पावर ग्रिड, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गज शेयर लूजर्स की सूची में शामिल रहे, जबकि आईटी सेक्टर की कंपनियों जैसे इंफोसिस और टीसीएस में मामूली बढ़त देखी गई।
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FII और DII के आंकड़े
निवेशकों के रुख की बात करें तो शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बाजार में 1,329.17 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 1,958.82 करोड़ रुपये की बिकवाली कर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया था। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक तनाव कम नहीं होता, बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में ‘आग’
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। ब्रेंट क्रूड का दाम 1.79 प्रतिशत बढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 2.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 103 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू रहा है। भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि कच्चा तेल महंगा होने से व्यापार घाटा बढ़ने और मुद्रास्फीति पर दबाव आने का खतरा रहता है।
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वैश्विक बाजारों का हाल और बॉन्ड यील्ड
केवल भारत ही नहीं, बल्कि टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और जकार्ता जैसे अधिकांश एशियाई बाजार भी लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। इससे पहले अमेरिकी बाजार भी शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे। इसके अलावा, अमेरिका में 10 साल के बॉन्ड की ब्याज दर का 4.63 प्रतिशत पर पहुंचना भी वैश्विक बाजारों में बिकवाली की एक प्रमुख वजह बन गया है।
