भारत की सोलर क्षमता 10 साल में होगी 4 गुना, कोयले पर निर्भरता घटकर रह जाएगी आधी
Renewable Energy India: अगले 10 साल में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 4 गुना बढ़ेगी और कोयले पर बिजली की निर्भरता 70% से घटकर 49% रह जाएगी, जिससे पर्यावरण और पावर सेक्टर को बड़ा लाभ होगा।
- Written By: प्रिया सिंह
भारत की सोलर क्षमता 10 साल में होगी 4 गुना (सोर्स-सोशल मीडिया)
Transition To Sustainable Green Energy: भारत के पावर सेक्टर में अगले एक दशक के दौरान एक बहुत ही क्रांतिकारी और ऐतिहासिक बदलाव आने वाला है जिससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी। बिजली मंत्रालय के सलाहकार की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार देश अब धीरे-धीरे बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है। इस योजना के तहत सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों पर निवेश बढ़ाकर पर्यावरण के अनुकूल विकास का लक्ष्य रखा गया है। यह बदलाव न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करेगा बल्कि भारत को भविष्य में एक स्वच्छ ऊर्जा महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।
सौर ऊर्जा का विस्तार
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी यानी सीईए की रिपोर्ट के अनुसार अगले 10 वर्षों में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता वर्तमान के मुकाबले 4 गुना तक बढ़ सकती है। रिपोर्ट बताती है कि साल 2035-36 तक गैर-जीवाश्म ईंधन से बनने वाली कुल बिजली क्षमता 786 गीगावॉट तक पहुंचने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसमें सौर ऊर्जा का योगदान सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा होगा क्योंकि कुल रिन्यूएबल ऊर्जा में इसकी हिस्सेदारी लगभग 65 प्रतिशत होने की संभावना है।
कोयले पर घटती निर्भरता
वर्तमान समय में भारत की बिजली जरूरतों का 70 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा अकेले कोयले से चलने वाले पावर प्लांटों द्वारा पूरा किया जा रहा है। हालांकि नई ऊर्जा नीति के तहत साल 2035-36 तक कोयले पर यह भारी निर्भरता काफी हद तक कम होकर लगभग 49 प्रतिशत के स्तर पर आ जाएगी। कोयले के उपयोग में आने वाली यह महत्वपूर्ण गिरावट पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत के बढ़ते कदमों और उसकी वैश्विक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
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पवन और परमाणु ऊर्जा
सौर ऊर्जा के साथ-साथ पवन ऊर्जा के क्षेत्र में भी आने वाले वर्षों में व्यापक विकास होगा और इसकी क्षमता में 3 गुना तक बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसी अवधि के दौरान परमाणु ऊर्जा की क्षमता भी वर्तमान स्तर से 3 गुना बढ़कर 22 गीगावॉट तक पहुंच सकती है जो बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करेगी। हाइड्रो यानी जलविद्युत परियोजनाओं की क्षमता में भी 50 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है ताकि भविष्य में बिजली की सप्लाई सुचारू रूप से चलती रहे।
स्टोरेज क्षमता में वृद्धि
भारत सरकार अब बिजली को स्टोर करने वाली तकनीकों जैसे बैटरी स्टोरेज और पंप्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर पर भी अपना पूरा ध्यान मजबूती से केंद्रित कर रही है। पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो की क्षमता वर्तमान के मुकाबले 13 गुना बढ़कर 94 गीगावॉट होने की उम्मीद है जो ग्रिड को स्थिरता प्रदान करने के लिए बहुत जरूरी है। वहीं बैटरी स्टोरेज क्षमता भी मौजूदा 0.27 गीगावॉट से बढ़कर 2035-36 तक 80 गीगावॉट तक पहुंच जाएगी जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी है।
ऊर्जा क्षेत्र का कायाकल्प
पावर सेक्टर में हो रहे ये बुनियादी बदलाव दर्शाते हैं कि भारत अब ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों से हटकर पूरी तरह से आधुनिक और स्वच्छ विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। स्टोरेज सिस्टम के विस्तार से सोलर और विंड जैसी अस्थिर ऊर्जा को संतुलित किया जा सकेगा जिससे देश के हर हिस्से में बिजली की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित होगी। इस दीर्घकालिक योजना का मुख्य उद्देश्य रिन्यूएबल ऊर्जा को बड़े स्तर पर मुख्यधारा में शामिल करना और भविष्य की चुनौतियों के लिए ग्रिड को तैयार करना है।
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सतत भविष्य की ओर कदम
भारत की यह नई ऊर्जा रणनीति न केवल बिजली संकट को दूर करेगी बल्कि देश के आर्थिक विकास को भी एक नई और तेज गति प्रदान करने में सहायक होगी। नवीकरणीय ऊर्जा पर बढ़ता भरोसा पर्यावरण के प्रति भारत की जिम्मेदारी को भी पुख्ता करता है जिससे आने वाली पीढ़ियों को एक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिलेगा। कोयले के घटते प्रभाव और सौर-पवन ऊर्जा के बढ़ते साम्राज्य से भारत का पावर सेक्टर अगले 10 वर्षों में पूरी तरह से बदलता हुआ दिखाई देगा।
