भारत शिपबिल्डिंग और समुद्री साझेदारी के लिए दक्षिण कोरिया से चाहता है सहयोग: सर्बानंद सोनोवाल
International News: केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत 2047 तक दुनिया के टॉप 5 शिपबिल्डिंग देशों में शामिल होने के लक्ष्य के लिए दक्षिण कोरिया को एक मजबूत पार्टनर मानता है।
- Written By: प्रिया सिंह
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल (सोर्स- सोशल मीडिया)
India Seeks Strong Shipbuilding And Maritime Partnership with South Korea: केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री, सर्बानंद सोनोवाल ने हाल ही में भारत के समुद्री क्षेत्र की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर प्रकाश डाला है। भारत ने वर्ष 2047 तक दुनिया के शीर्ष शिपबिल्डिंग राष्ट्रों में अपनी जगह बनाने का लक्ष्य रखा है। इस बड़ी छलांग के लिए, भारत दक्षिण कोरिया को एक अहम और भरोसेमंद साथी के रूप में देख रहा है। सोनोवाल ने अपनी शिपबिल्डिंग क्षमता बढ़ाने और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सहयोग पर जोर दिया है।
भारत और दक्षिण कोरिया, शिपबिल्डिंग में मजबूत साझेदारी
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार को अपनी दक्षिण कोरिया यात्रा के दौरान भारत के समुद्री और शिपबिल्डिंग लक्ष्यों पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक ‘विकसित राष्ट्र’ बनने के अपने लक्ष्य पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस सफर में दक्षिण कोरिया का तेज आर्थिक विकास एक महत्वपूर्ण प्रेरणास्रोत है।
टॉप 5 में शामिल होने की तैयारी
भारत ने शिपबिल्डिंग के क्षेत्र में बड़े सपने देखे हैं। देश का लक्ष्य है कि वह 2030 तक दुनिया के शीर्ष 10 शिपबिल्डिंग राष्ट्रों में और 2047 तक दुनिया के शीर्ष 5 देशों में शामिल हो जाए। ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत, सरकार अपने कमर्शियल जहाजों के बेड़े (Commercial Fleet) को 1,500 से बढ़ाकर 2,500 करने की योजना पर काम कर रही है। इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को पूरा करने के लिए सरकार $24 अरब (करीब दो लाख करोड़ रुपये) के भारी-भरकम निवेश की योजना भी बना रही है।
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कोरिया क्यों है महत्वपूर्ण साझीदार?
केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने दक्षिण कोरिया को भारत का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पार्टनर बताया। उन्होंने कहा कि कोरिया की एडवांस्ड (उन्नत) शिपबिल्डिंग टेक्नोलॉजी और उसकी जहाज बनाने की भरोसेमंद और उच्च-गुणवत्ता की क्षमताएं उसे भारत के लिए सबसे उपयुक्त बनाती हैं। सोनोवाल के अनुसार, कोरिया की सफलता यह दिखाती है कि अगर सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थान (Academia) मिलकर काम करें और लक्षित प्रोत्साहन (Targeted Incentives) दिए जाएं, तो इनोवेशन (नवाचार) के जरिए क्षमताओं को कितनी तेजी से बढ़ाया जा सकता है।
तकनीकी सहयोग से मिलेगा फायदा
कोरिया की साझेदारी से भारत को शिप डिजाइन, प्रोडक्शन प्रॉसेस (उत्पादन प्रक्रिया), ऑटोमेशन (स्वचालन), ग्रीन शिप टेक्नोलॉजी (पर्यावरण-अनुकूल जहाज़ तकनीक) और वैश्विक गुणवत्ता मानकों (Global Quality Standards) को अपनाने में मदद मिलेगी। मंत्री सोनोवाल ने कहा कि कोरिया भारत के लिए एक रणनीतिक निवेशक (Strategic Investor) और क्षमता विकास पार्टनर (Capability Partner) साबित हो सकता है।
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बढ़ता हुआ सहयोग
दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। इसी साल जुलाई में, दक्षिण कोरिया की दिग्गज कंपनी एचडी हुंडई (HD Hyundai) ने शिपबिल्डिंग में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत की सरकारी कंपनी कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) के साथ एक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पहली बार है जब किसी दक्षिण कोरियाई शिपबिल्डर ने भारतीय कंपनी के साथ इस तरह की पार्टनरशिप की है। सोनोवाल ने उम्मीद जताई है कि दोनों देशों के बीच इस सहयोग से दोनों पक्षों को बहुत फायदा होगा।
