सिर्फ निवेश नहीं, शानदार रिटर्न भी! रिटायरमेंट फंड के लिए NPS क्यों बन रहा पहली पसंद, जानें सबकुछ
National Pension System: आप भी रिटायरमेंट के बाद अपने फ्यूचर को सिक्योर करने के लिए एनपीएस स्कीम में निवेश की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से पूरी डिटेल्स बताने वाले हैं।
- Written By: मनोज आर्या
नेशनल पेमेंट सिस्टम, (सोर्स- सोशल मीडिया)
National Pension System Benefit: आज के समय में केवल बचत करना ही काफी नहीं है, रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने रहना भी बेहद जरूरी हो गया है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) की 1 जनवरी 2004 से शुरुआत की थी। यह एक लंबी अवधि की निवेश योजना है, जिसका उद्देश्य लोगों को रिटायरमेंट के बाद नियमित आय (पेंशन) उपलब्ध कराना है। शुरुआत में यह योजना सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू थी, लेकिन अब 18 से 70 वर्ष तक का कोई भी भारतीय नागरिक इसमें निवेश कर सकता है।
ऐसे में अगर आप भी रिटायरमेंट के बाद अपने फ्यूचर को सिक्योर करने और बुढ़ापे में आर्थिक तंगी से बचे रहने के लिए एनपीएस स्कीम में निवेश की प्लानिंग कर रहे हैं, लेकिन आपको इसके बारे ज्यादा जानकारी नहीं है कि ये कैसे काम करता है, कितना रिटर्न मिलता है, पैसे कब निकाल सकते हैं… तो आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से पूरी डिटेल्स बताने वाले हैं।
नेशनल पेंशन सिस्टम क्या है?
दरअसल, एनपीएस एक मार्केट लिंक्ड रिटायरमेंट स्कीम है, जिसमें निवेशक नियमित रूप से अपनी क्षमता के अनुसार पैसा जमा करता है। समय के साथ निवेश पर मिलने वाला रिटर्न आपके रिटायरमेंट फंड को बढ़ाता है। 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर इस फंड का एक हिस्सा एकमुश्त निकाला जा सकता है, जबकि शेष राशि से एन्युटी खरीदकर हर महीने पेंशन प्राप्त कर सकते हैं। इस स्कीम में लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है, निवेश की लागत कम होती है और टैक्स बचत का लाभ भी मिलता है।
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इसके साथ ही रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन मिलने से आर्थिक सुरक्षा बनी रहती है। ऑनलाइन अकाउंट खोलने और निवेश करने की सुविधा होने से इसे संचालित करना भी आसान है। 18 से 70 वर्ष तक का कोई भी भारतीय नागरिक, चाहे वह नौकरीपेशा हो, व्यवसायी हो या स्वरोजगार करता हो, एनपीएस में निवेश कर सकता है। इसके लिए आधार, पैन, बैंक खाता और केवाईसी की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। अनिवासी भारतीय (एनआरआई) भी निर्धारित शर्तों के तहत एनपीएस अकाउंट खोल सकते हैं।
कैसे खोल सकते हैं NPS अकाउंट?
वहीं, अब एनपीएस अकाउंट खोलना बेहद आसान हो गया है। कोई भी व्यक्ति घर बैठे ऑनलाइन या बैंक शाखा के माध्यम से ऑफलाइन अकाउंट खोल सकता है। ऑनलाइन अकाउंट एनएसडीएल ईएनपीएस पोर्टल, केफिनटेक ईएनपीएस पोर्टल, कई बैंकों की इंटरनेट बैंकिंग या अन्य अधिकृत प्लेटफॉर्म के जरिए खोला जा सकता है। वहीं, यदि कोई ऑफलाइन प्रक्रिया अपनाना चाहता है, तो वह किसी अधिकृत बैंक, पोस्ट ऑफिस या एनपीएस पॉइंट ऑफ प्रजेंस (पीओपी) पर जाकर आवेदन कर सकता है।
इस स्कीम में निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं है। टायर-1 खाते में अकाउंट खोलने के समय कम से कम 500 रुपए जमा करना होता है और पूरे वित्त वर्ष में न्यूनतम 1,000 रुपए का निवेश अनिवार्य है। इसके बाद निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार मासिक, तिमाही या सालाना निवेश कर सकता है। जितना अधिक और जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगे, रिटायरमेंट तक उतना बड़ा फंड तैयार हो सकता है।
एनपीएस की सबसे बड़ी खासियत
एनपीएस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेश केवल एक जगह नहीं लगाया जाता। निवेशक का पैसा शेयर बाजार, सरकारी प्रतिभूतियों, कॉरपोरेट बॉन्ड और अन्य निवेश विकल्पों में विभाजित किया जाता है। निवेशक चाहे तो अपनी पसंद के अनुसार एसेट एलोकेशन तय कर सकता है या फिर ऑटो चॉइस का विकल्प चुन सकता है, जिसमें उम्र के अनुसार निवेश का अनुपात अपने आप बदलता रहता है। एनपीएस में बैंक एफडी की तरह निश्चित ब्याज नहीं मिलता, क्योंकि यह एक मार्केट लिंक्ड स्कीम है। इसका रिटर्न इस बात पर निर्भर करता है कि आपके चुने हुए पेंशन फंड मैनेजर और निवेश किए गए एसेट्स का प्रदर्शन कैसा रहा।
पिछले कई वर्षों में अलग-अलग एनपीएस फंडों ने औसतन लगभग 9 प्रतिशत से 12 प्रतिशत सालाना तक का रिटर्न दिया है, जबकि कुछ इक्विटी आधारित स्कीम्स में इससे भी बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है। हालांकि, भविष्य का रिटर्न पूरी तरह बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है और इसकी कोई गारंटी नहीं होती।
टैक्स बचत के लिए भी NPS लोक्रपिय
इसके साथ ही एनपीएस टैक्स बचाने के लिहाज से भी काफी लोकप्रिय स्कीम है। आयकर अधिनियम की धारा 80सीसीडी(1) के तहत निवेश पर टैक्स छूट मिलती है। इसके अलावा धारा 80सीसीडी(1बी) के तहत अतिरिक्त 50,000 रुपए तक की टैक्स छूट का लाभ भी लिया जा सकता है। यदि नियोक्ता भी एनपीएस में योगदान करता है, तो धारा 80सीसीडी (2) के तहत अलग से टैक्स लाभ मिलता है। इस वजह से एनपीएस को रिटायरमेंट प्लानिंग के साथ-साथ टैक्स सेविंग का भी अच्छा विकल्प माना जाता है।
जब निवेशक 60 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है, तब उसे अपने कुल जमा फंड का 60 प्रतिशत तक हिस्सा एकमुश्त निकालने की अनुमति होती है। बाकी कम से कम 40 प्रतिशत राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य होता है। इसी एन्युटी के आधार पर निवेशक को हर महीने पेंशन मिलती है। यदि कुल कॉर्पस नियामक द्वारा निर्धारित सीमा से कम है, तो कुछ मामलों में पूरी राशि एक साथ निकालने की भी अनुमति मिल सकती है।
क्या 60 साल से पहले निकाला जा सकता है पैसा?
तो बता दें कि एनपीएस पूरी तरह लॉक-इन योजना नहीं है। यदि निवेशक को किसी विशेष आवश्यकता के लिए धन चाहिए, तो कम से कम तीन वर्ष तक निवेश करने के बाद वह अपने स्वयं के योगदान का 25 प्रतिशत तक आंशिक निकासी कर सकता है। यह सुविधा बच्चों की पढ़ाई, शादी, घर खरीदने, घर बनाने या गंभीर बीमारी के इलाज जैसी जरूरतों के लिए दी जाती है। वहीं, अगर कोई निवेशक 60 वर्ष की आयु से पहले पूरी तरह एनपीएस से बाहर निकलना चाहता है, तो सामान्य स्थिति में वह केवल 20 प्रतिशत राशि एकमुश्त निकाल सकता है, जबकि शेष 80 प्रतिशत राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य होता है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि एनपीएस के कई फायदे हैं, लेकिन इसमें कुछ सीमाएं भी हैं। इसमें मिलने वाला रिटर्न पूरी तरह बाजार पर निर्भर करता है, इसलिए निश्चित ब्याज की गारंटी नहीं होती। इसके अलावा 60 वर्ष से पहले पूरी राशि निकालने की अनुमति नहीं मिलती और रिटायरमेंट के समय कम से कम 40 प्रतिशत राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य होता है। एन्युटी से मिलने वाली मासिक पेंशन भी उस समय की ब्याज दरों और चुनी गई योजना पर निर्भर करती है।
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एनपीएस को लेकर क्या है एक्सपर्ट की राय?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आपकी उम्र कम है, आप नियमित निवेश कर सकते हैं, रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड बनाना चाहते हैं और साथ ही टैक्स बचाने का लाभ भी लेना चाहते हैं, तो एनपीएस आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद माना जाता है जो लंबी अवधि के लिए अनुशासित तरीके से निवेश करना चाहते हैं और रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन के रूप में आय प्राप्त करना चाहते हैं।
