आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा, (सोर्स- सोशल मीडिया)
RBI Governer On Middle East Crisis: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करते हुए स्थिर रखा है। इसके साथ ही जीडीपी ग्रोथ और महंगाई के जोखिमों पर भी चिंता जताई। अमेरिका-ईरान युद्ध और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को भी भारत की विकास संभावनाओं के लिए एक जोखिम के रूप में बताया गया है।
आरबीई गवर्नर ने कहा कि संघर्ष शुरू होने से पहले, भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति मजबूत थी, जिसमें विकास की गति तेज थी और महंगाई कम थी। मार्च में संघर्ष तीव्र होने के साथ ही परिस्थितियां विपरित हो गईं।
संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादें मौजूदा समय में पिछले संकटों की तुलना में और कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत हैं। केंद्रीय बैंक के गवर्नर का मानना है कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को झटकों का सामना करने के लिए अधिक लचीलापन मिलेगा। हालांकि, विकास संबंधी अनुमानों के लिए नकारात्मक जोखिम बने हुए हैं। खासकर पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष की स्थिति में कोई सुधार नहीं होता है तो स्थिति और खराब हो सकती है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने उन पांच तरीकों की ओर इशारा किया जिनसे मौजूदा संघर्ष से भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। उन्होंने उन माध्यमों का विस्तार से बताया जिनके जरिए यह झटका महसूस किया जा सकता है।
आरबीआई गवर्नर ने चेतावनी दी है कि आपूर्ति में आई रुकावट, जो अभी शुरू में एक आपूर्ति संकट के रूप में दिख रही है, मध्यम अवधि में मांग संकट में बदल सकती है यदि सप्लाई चेन की बहाली में देरी होती है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 7.6% रहने का अनुमान है, जबकि आरबीआई के वित्त वर्ष 2027 की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा में किए गए प्रारंभिक आकलन के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.9% रहने की संभावना है।
यह भी पढ़ें: RBI ने रेपो रेट में फिर नहीं किया कोई बदलाव, इन्फ्लेशन 4.6% पर बरकरार, जानिए आपकी जेब पर कैसा होगा असर
आरबीआई ने पूर्वानुमान लगाया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी 6.8%, दूसरी तिमाही में 6.7%, तीसरी तिमाही में 7% और चौथी तिमाही में 7.2% की दर से बढ़ेगी। संजय मल्होत्रा ने अपने बयान में कहा कि आगे चलकर, ऊर्जा और अन्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों के साथ-साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में रूकावट के कारण इनपुट की उपलब्धता में आने वाली बाधाओं से 2026-27 में विकास प्रभावित होने की संभावना है।