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हिंडनबर्ग ने पूछा- अपने ग्राहकों के बारे में कब जानकारी सार्वजनिक करेंगी माधबी पुरी बुच
- Written By: विजय कुमार तिवारी
हिंडनबर्ग की रिपोर्ट और देश में बन रहे माहौल को लेकर सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच पर दबाव बढ़ने लगा है और माना जा रहा है कि उनको उन तमाम जानकारियों को साझा करना पड़ सकता है, जिनको लेकर सवाल उठ रहे हैं..

हिंडनबर्ग रिसर्च और माधबी पुरी बुच (डिजाइन फोटो)
नई दिल्ली : अमेरिकी शोध एवं निवेश कंपंनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने दावा किया कि बाजार नियामक सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने अब सार्वजनिक रूप से बरमूडा व मॉरीशस फंड संरचना में अपने निवेश की पुष्टि की है। हिंडनबर्ग ने कहा कि उन्हें अपने सभी परामर्श ग्राहकों के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए, जिनके साथ उनकी सिंगापुर और भारतीय परामर्श कंपनियों ने काम किया है। इससे देश के निवेशकों को सही जानकारी मिलेगी और लोगों को भी पता चलेगा कि वहां क्या-क्या हुआ है।
बुच और उनके पति द्वारा हिंडेनबर्ग के नवीनतम हमले को सेबी की विश्वसनीयता पर हमला और ‘‘चरित्र हनन” का प्रयास बताते हुए बयान जारी करने के कुछ घंटों बाद हिंडनबर्ग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कई पोस्ट किए और कहा कि दंपत्ति के बयान में कई महत्वपूर्ण बातों को स्वीकार किया गया और इससे कई महत्वपूर्ण प्रश्न भी खड़े होते हैं।
शोध एवं कंपनी ने कहा, ‘‘ बुच के जवाब से अब सार्वजनिक रूप से बरमूडा व मॉरीशस के एक अस्पष्ट कोष में उनके निवेश की पुष्टि हो गई है, साथ ही विनोद अदाणी द्वारा कथित रूप से गबन किया गया पैसा भी। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि कोष उनके पति के बचपन के दोस्त द्वारा चलाया जाता था, जो उस समय अदाणी के निदेशक थे।”
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हिंडनबर्ग ने शनिवार देर रात जारी अपनी नई रिपोर्ट में कहा था कि बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की चेयरपर्सन बुच और उनके पति धबल बुच ने बरमूडा तथा मॉरीशस में अस्पष्ट विदेशी कोषों में अघोषित निवेश किया था। उसने कहा कि ये वही कोष हैं जिनका कथित तौर पर विनोद अदाणी ने पैसों की हेराफेरी करने तथा समूह की कंपनियों के शेयरों की कीमतें बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया था। विनोद अदाणी, अदाणी समूह के चेयरपर्सन गौतम अदाणी के बड़े भाई हैं।
बुच दंपति ने ऐसे दी सफाई
आरोपों के जवाब में बुच दंपति ने रविवार को एक संयुक्त बयान में कहा कि ये निवेश 2015 में किए गए थे, जो 2017 में सेबी के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में उनकी नियुक्ति तथा मार्च 2022 में चेयरपर्सन के रूप में उनकी पदोन्नति से काफी पहले था। ये निवेश ‘‘ सिंगापुर में रहने के दौरान निजी तौर पर आम नागरिक की हैसियत से” किए गए थे। सेबी में उनकी नियुक्ति के बाद ये कोष ‘‘निष्क्रिय” हो गए।
हिंडनबर्ग का दावा
मामले में हिंडनबर्ग ने कहा, ‘‘ सेबी को अदाणी मामले से संबंधित निवेश निधियों की जांच करने का काम सौंपा गया था, जिसमें बुच द्वारा व्यक्तिगत रूप से निवेशित निधियां और उसी प्रायोजक द्वारा निवेशित निधियां शामिल हैं जिन्हें हमारी मूल रिपोर्ट में विशेष रूप से उजागर किया गया था। यह स्पष्ट रूप से हितों का एक बड़ा टकराव है।”
बुच के बयान के अनुसार, दोनों कोषों में निवेश धवल के बचपन के दोस्त अनिल आहूजा की सलाह पर किया गया था। आहूजा की पहचान हिंडनबर्ग ने शनिवार को मॉरीशस स्थित ‘आईपीई प्लस फंड’ के संस्थापक एवं मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) के तौर पर की। वहीं अदाणी समूह ने रविवार को अपने बयान में कहा था कि वह (अनिल आहूजा) अदाणी पावर (2007-2008) में 3i इन्वेस्टमेंट फंड के ‘नॉमिनी’ थे और जून 2017 तक नौ साल के तीन कार्यकालों में अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक के रूप में उन्होंने काम किया।
हिंडनबर्ग ने कहा कि बुच के बयान में यह भी दावा किया गया कि उन्होंने जो दो परामर्श कंपनियां स्थापित कीं, जिनमें भारतीय इकाई तथा सिंगापुरी इकाई शामिल हैं…वे 2017 में ‘‘ सेबी में उनकी नियुक्ति के तुरंत बाद निष्क्रिय हो गईं ” और 2019 में उनके पति ने कार्यभार संभाल लिया। 31 मार्च 2024 तक की अपनी नवीनतम शेयरधारिता सूची के अनुसार, अगोरा एडवाइजरी लिमिटेड (इंडिया) का 99 प्रतिशत स्वामित्व अब भी माधबी बुच के पास है, न कि उनके पति के पास। यह इकाई वर्तमान में सक्रिय है और इससे राजस्व हासिल किया जा रहा है।”
अमेरिकी कंपनी ने कहा कि इसके अलावा, सिंगापुर के रिकॉर्ड के अनुसार 16 मार्च 2022 तक अगोरा पार्टनर्स सिंगापुर में उनकी 100 प्रतिशत शेयरधारिता थी। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य के रूप में अपने पूरे कार्यकाल के दौरान वह इसकी मालिक रहीं। इसमें आरोप लगाया गया, ‘‘ उन्होंने सेबी की चेयरपर्सन के रूप में अपनी नियुक्ति के दो सप्ताह बाद अपने शेयर अपने पति के नाम पर स्थानांतरित किए।”
सेबी कर रही चेयरपर्यन का बचाव
सेबी ने भी अपनी चेयरपर्यन का बचाव किया। दो पृष्ठ के बयान में कहा गया कि बुच ने समय-समय पर प्रासंगिक खुलासे किए हैं और उन्होंने ‘‘ संभावित हितों के टकराव से जुड़े मामलों से भी खुद को अलग रखा है।”
अदाणी समूह ने भी सेबी प्रमुख के साथ किसी भी तरह के वाणिज्यिक लेन-देन से इनकार किया है। संपत्ति प्रबंधन इकाई 360वन (जिसे पहले आईआईएफएल वेल्थ मैनेजमेंट कहा जाता था) ने अलग से बयान में कहा कि बुच तथा उनके पति धवल बुच का आईपीई-प्लस फंड 1 में निवेश कुल निवेश का 1.5 प्रतिशत से भी कम था और उसने अदाणी समूह के शेयरों में कोई निवेश नहीं किया था। हिंडनबर्ग के अनुसार, बुच ने कहा कि उनके पति ने 2019 से ही परामर्श संस्थाओं का इस्तेमाल भारतीय उद्योग में अनाम ‘प्रमुख ग्राहकों’ के साथ लेन-देन करने के लिए किया। इसमें कहा गया, ‘‘ क्या इनमें वे ग्राहक भी शामिल हैं जिन्हें विनियमित करने का काम सेबी को सौंपा गया है।”
इसे भी पढ़ें.. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर अदाणी ने पेश की सफाई, सेबी चीफ के साथ सांठगांठ के आरोपों को किया सिरे से खारिज
हिंडनबर्ग ने पूछा, ‘‘ बुच के बयान में पूर्ण पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता का वादा किया गया है। इसे देखते हुए क्या वह परामर्श ग्राहकों की पूरी सूची तथा सिंगापुरी परामर्श कंपनी, भारतीय परामर्श कंपनी और किसी अन्य संस्था के जरिये किए गए अनुबंधों का विवरण सार्वजनिक करेंगी, जिसमें उनका या उनके पति का हित हो सकता है?”
शोध एवं निवेश कंपनी ने कहा, ‘‘ अंततः, क्या सेबी चेयरपर्सन इन मुद्दों की पूर्ण, पारदर्शी तथा सार्वजनिक जांच के लिए प्रतिबद्धता दिखाएंगी ?”
-एजेंसी इनपुट के साथ
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