

त्योहारों के सीजन में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट
चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा गिरावट
पीएम मोदी की अपील के बाद सोने-चांदी की खरीद में आई कमी का दावा
What Is The Reason For Gold And Silver Becoming Cheaper?: भारत देश में लोगों को आभूषण पहनने का शौक है। शादी, ब्याह, किसी शुभ कार्य या फिर त्योहारों के मौके पर लोग सोने और चांदी के गहने खरीदते है। सोने-चांदी के कीमतों में बढ़ोत्तरी जब होती तो आमजनता इसके खरीद से परहेज करती है और सोने-चांदी के भाव कम होने का इंतजार करती है। बीते कुछ महीनों की बात करें तो सोने और चांदी के भाव आसमान छू रहे थे।
वैश्विक उथल-पुथल के समय देश की जनता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने भावुक अपील करते हुए कहा था कि देश की जनता अगर सालभर सोने और चांदी को खरीदने से बचेगी तो वैश्विक पटल पर भारत की स्थिति बहुत मजबूत होगी।
जनता ने भी वैश्विक अघोषित आपात में देश की स्थिति को मजबूत करने के लिए सोने और चांदी की खरीद में कमी की। इसका परिणाम भी देखने को मिला। मौजूदा समय में त्योहारों के सीजन में जहां हर बार सोने और चांदी के दाम आसमान छूते है तो वहीं इस बार बीते कुछ दिनों से दाम कम हो रहे है।
त्योहारी सीजन और धनतेरस-दिवाली से पहले कीमती धातुओं के दाम में आई इस गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान खींचा है। खास बात यह है कि चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सोने-चांदी की कीमतें क्यों गिर रही हैं?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में शनिवार को सोना 145.84 डॉलर (करीब 4%) की भारी गिरावट के साथ 3,875.55 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ है, जो पिछले एक साल से अधिक का निचला स्तर है।
चांदी में 3.04 डॉलर (लगभग 6%) की गिरावट आई है और यह 49.12 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई है। सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट की 5 बड़ी वजहें हैं।
सोने की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता है। अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा मजबूत आए हैं। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रखने या दिसंबर में बढ़ाने की आशंका बढ़ गई है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो निवेशक सोने के बजाय ब्याज देने वाले विकल्पों की तरफ आकर्षित होते हैं।
अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनियों के खर्च को लेकर निवेशकों की चिंता भी कीमती धातुओं पर भारी पड़ी है। शेयर बाजार में नुकसान की भरपाई करने और नकदी जुटाने के लिए कुछ निवेशकों ने सोने-चांदी में भी बिकवाली की। इससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना।
पिछले कुछ समय में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में बिकवाली होने से बाजार में कीमतों का संतुलन बिगड़ा और सोने-चांदी के भाव नीचे आने लगे।
सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में ज्यादा गिरावट की एक वजह इसकी औद्योगिक मांग भी है। चांदी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई औद्योगिक उत्पादों में होता है। बाजार में औद्योगिक मांग कमजोर होने और भविष्य में आपूर्ति बढ़ने की आशंका ने चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
कीमतों में गिरावट के बाद खरीदारों के मन में सोना-चांदी खरीदने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक केवल मौजूदा गिरावट देखकर निवेश का फैसला करना सही नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की चाल, अमेरिकी फेडरल रिजर्व का फैसला, कच्चे तेल की कीमतें और महंगाई के आंकड़े आगे भी सोने-चांदी की दिशा तय करेंगे।
अगर कोई लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहता है तो एकमुश्त निवेश के बजाय अलग-अलग चरणों में खरीदारी करने के विकल्प पर विचार कर सकता है।