

IDBI बैंक को कनाडा की कंपनी को सौंपने की तैयारी
विरोध में बैंक के कर्मचारी और अधिकारी करेंगे देशव्यापी हड़ताल
IDBI बैंक को बेचने के फैसले पर राहुल गांधी ने कर्मचारियों का समर्थन किया
Preparations Underway To Hand Over IDBI Bank To Canadian Firm Fairfax: IDBI बैंक के अधिकारियों और कर्मचारियों के संगठन ने बैंक की ज्यादातर हिस्सेदारी कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स को बेचने के फैसले का विरोध किया है। संगठन ने सरकार से इस बिक्री की प्रक्रिया तुरंत रोकने और संसद की निगरानी में इसकी दोबारा जांच कराने की मांग की है।
कर्मचारी संगठन का कहना है कि बैंक को बेचने का फैसला सही समय पर नहीं लिया गया है। उनका मानना है कि बैंक की कीमत का सही आकलन होना चाहिए और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। इस मामले पर आम लोगों के बीच भी चर्चा होनी चाहिए।
IDBI बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुराव कुमार ने बातचीत में कहा कि बैंक को बेचने की कोई जरूरत नहीं है, खासकर किसी विदेशी कंपनी को।
IDBI बैंक लंबे समय तक आर्थिक संकट से जूझता रहा। मई 2017 में RBI ने बैंक की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए उसे PCA यानी सुधार से जुड़े प्रतिबंधों के तहत डाल दिया था।
मार्च 2017 तक बैंक का खराब कर्ज (NPA) 13 प्रतिशत से ज्यादा हो गया था। इसके अलावा बैंक के पास पर्याप्त पूंजी भी नहीं थी और उसे नुकसान हो रहा था।
2019 की शुरुआत में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने IDBI बैंक की 51 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद ली। इसके बाद LIC बैंक का सबसे बड़ा शेयरधारक बन गया।
बाद में RBI ने IDBI बैंक को निजी क्षेत्र के बैंक की श्रेणी में रख दिया। बैंक की हालत में सुधार होने के बाद मार्च 2021 में RBI ने उस पर लगे PCA प्रतिबंध हटा दिए।
14 अक्टूबर को कैबिनेट ने IDBI बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के लिए कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स को मंजूरी दी। यह सौदा 52,878 करोड़ रुपये का है।
सरकार का कहना है कि बैंक की कीमत तय करने के लिए स्वतंत्र एजेंसियों की मदद ली गई है। इन एजेंसियों ने बैंक की संपत्ति और बाजार से जुड़े कई पहलुओं को ध्यान में रखकर मूल्यांकन किया है।
सरकार का यह भी कहना है कि शेयर बाजार में बैंक के शेयर की कीमत में होने वाले उतार-चढ़ाव को बैंक की असली कीमत मानना सही नहीं होगा।
IDBI बैंक को बेचने के फैसले पर राहुल गांधी ने कर्मचारियों का समर्थन किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बैंक दोबारा मुनाफा कमाने लगा है, तो सरकार इसे क्यों बेचना चाहती है।
राहुल गांधी ने कर्मचारियों की नौकरी, पेंशन और निजीकरण से आरक्षण पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई है।
वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसके शासनकाल में बैंकों पर दबाव डालकर पसंदीदा उद्योगपतियों को कर्ज दिया जाता था। उनके मुताबिक, इसी वजह से IDBI बैंक को खराब कर्ज की समस्या झेलनी पड़ी।
सीतारमण ने कहा कि मोदी सरकार ने बैंक में पूंजी लगाकर और उसका प्रबंधन सुधारकर उसकी हालत बेहतर की है।
सरकार के बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने के फैसले के विरोध में IDBI बैंक के कर्मचारी संगठनों ने 2 और 3 नवंबर को हड़ताल करने का ऐलान किया है। कर्मचारी इस बिक्री को रोकने और पूरे मामले की दोबारा समीक्षा करने की मांग कर रहे हैं।