SEBI के आरोप के बाद बड़ा एक्शन! राजेश एक्सपोर्ट्स के कई ठिकानों पर ED की छापेमारी, मचा हड़कंप
ED Raids On Rajesh Exports: ईडी कंपनी और उससे जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की है। कंपनी के फाइनेंशियल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और फंड फ्लो से संबंधित डॉक्यूमेंट की जांच की जा रही है।
- Written By: मनोज आर्या
राजेश एक्सपोर्ट्स पर ईडी की छापेमारी, (सोर्स- सोशल मीडिया)
ED Raids On Rajesh Exports: भारत की मशहूर ज्वेलरी और गोल्ड एक्सपोर्ट कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स इन दिनों चर्चाओं में है। कंपनी और उसके प्रमोटर्स राजेश मेहता के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने आज मंगलवार को बेंगलुरु स्थित कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई ऐसे समय में की है, जब कुछ दिन पहले ही बाजार नियामक सेबी ने कंपनी के फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और अकाउंटिंग को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय की टीम राजेश एक्सपोर्ट्स और उससे जुड़े लोगों के परिसरों पर छापेमारी की कार्रवाई की। ईडी ने कंपनी के फाइनेंशियल रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और फंड फ्लो से संबंधित डॉक्यूमेंट की गहन जांच कर रही है। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर जांच एजेंसी ने अभी तक कोई अधिकारिक बयान नहीं दिया है। ऐसा कहा जा रहा है कि यह छापेमारी सेबी की हालिया रिपोर्ट में सामने आए जानकारियों के आधार पर की जा रही है।
सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में क्या कहा?
बता दें कि मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने अपने इंटरनल ऑर्डर में कंपनी और उसके प्रमुख राजेश मेहता और उनसे जुड़े कुछ अन्य संस्थाओं पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि कंपनी ने कई संबंधित संस्थाओं के माध्यम से कॉम्प्लैक्स लेनदेन किए, जिससे पैसों के वास्तविक सोर्स एंड रिसीवर को समझना मुश्किल हो गया। इन ट्रांजैक्शन का स्ट्रक्चर ऐसा था कि फंड ट्रेल को जानबूझकर छिपाने की कोशिश की गई।
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सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर यह भी आरोप लगाया है कि अपने दावों को साबित करने के लिए कंपनी ने कोई जरूरी डॉक्यूमेंट जैसे कि लोने एग्रीमेंट, बोर्ड की अप्रूवल और अन्य रिकॉर्ड पेश नही कर सकी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अप्रैल 2020 से सितंबर 2025 के बीच कंपनी ने प्रमोटर राजेश मेहता को लगभग 338.90 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जबकि वापस केवल 232.44 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
राजेश एक्स्पोर्ट्स विवाद क्या है?
बता दें कि इस पूरे मामले कि शुरुआत मार्च 2024 में एक शेयरहोल्डर की शिकायत से हुई थी, जिसने कंपनी के एकाउंटिंग में सालों से लंबित बड़े ‘ट्रेड रिसीवेबल्स’ (यानी ग्राहकों से बकाया पैसा) पर चिंता जताई थी। इसके बाद सेबी ने वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 (5 साल) के बीच की अवधि के लिए फॉरेंसिक ऑडिट और औपचारिक जांच शुरू की। इस जांच में जो बातें सामने आईं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं।
1. 15.15 लाख करोड़ रुपये का फर्जी राजस्व: सेबी का आरोप है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने पिछले 5 वर्षों में अपने कुल कंसोलिडेटेड रेवेन्यू का लगभग 97 प्रतिशत से 99.8 प्रतिशत हिस्सा बढ़ा-चढ़ाकर या फर्जी तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
2. ओवरसीज सब्सिडियरीज का खेल: कंपनी ने दिखाया कि उसका 98 प्रतिशत से ज्यादा राजस्व भारत के बाहर की विदेशी कंपनियों (जैसे सिंगापुर और स्विट्जरलैंड की से आ रहा है। मार्केट रेग्युलेटर के मुताबिक, जब इन विदेशी सब्सिडियरीज के लेन-देन के डॉक्यूमेंटेड सबूत मांगे गए, तो कंपनी कोई ठोस रिकॉर्ड या इनवॉइस नहीं दिखा पाई।
3. पर्सनल ट्रेडिंग को कंपनी का बिजनेस दिखाया: सेबी ने पाया कि प्रमोटर राजेश मेहता अपने पर्सनल अकाउंट से एक ब्रोकिंग फर्म (Affluence Shares & Stocks) के जरिए सोने के डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग कर रहे थे। उन्होंने अपने इस निजी घाटे/मुनाफे और लेन-देन को राजेश एक्सपोर्ट्स के कॉरपोरेट खातों में कंपनी की ‘सेल और परचेज’ 11,487 करोड़ रुपये की बिक्री और 11,488 करोड़ रुपये की खरीद के रूप में दर्ज कर दिया।
4. फंड की हेराफेरी: बिना बोर्ड या ऑडिट कमिटी की मंजूरी के कंपनी के खातों से 339 करोड़ रुपये प्रमोटर राजेश मेहता के प्राइवेट अकाउंट में ट्रांसफर किए गए, जिसमें से केवल 232 करोड़ रुपये ही वापस आए।
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कंपनी के खिलाफ सेबी ने क्यों लिया एक्शन?
सेक्यूरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के होल टाईम मेंबर कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने अपने 109 पन्नों के आदेश में इस गड़बड़ी को असाधारण और अनसुनी करार दिया है। सेबी ने निवेशकों के हितों की रक्षा और मार्केट रेगुलेशन बनाए रखने के लिए तुरंत ये कदम उठाए हैं।
