

Highlights:
धनतेरस पर मुंबई महानगर सहित देशभर में खरीदारी का भारी उत्साह देखने को मिला।
महंगाई के बावजूद अधिकांश खुदरा बाजारों में खरीदारी के लिए ग्राहकों की भीड़ दिखी।
माता लक्ष्मी एवं भगवान गणेश की मूर्तियों सहित अन्य वस्तुओं की जमकर खरीद हुई।
Dhanteras Shopping Record 2026: शुक्रवार को धनतेरस पर मुंबई महानगर सहित देशभर में खरीदारी का भारी उत्साह देखने को मिला। महंगाई के बावजूद अधिकांश खुदरा बाजारों में ग्राहकों का तांता लगा रहा और सोने-चांदी, ऑटोमोबाइल, बर्तन, रसोई के सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, बिजली के उपकरण, मेवे, मिठाई, माता लक्ष्मी एवं भगवान गणेश की मूर्तियों सहित अन्य शुभ वस्तुओं की जमकर खरीदी की।
व्यापार महासंघ 'कैट' के आरंभिक अनुमान के मुताबिक, इस साल देश भर में धनतेरस के शुभ अवसर पर करीब 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ कुल ₹1.25 लाख करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड व्यापार होने का अनुमान है. जबकि अकेले मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में करीब 11,000 करोड़ रुपये के कारोबार दर्ज हुआ।
धनतेरस पर सर्राफा बाजारों में भी अच्छी बिक्री हुई। पिछले एक माह में सोना-चांदी में 5 से 15 प्रतिशत की बड़ी गिरावट से ग्राहकों का उत्साह बढ़ा और मंदी का फायदा उठाते हुए लोगों ने सोने के आभूषण, चांदी के बर्तन और सिक्कों की खरीदी कर कीमती धातुओं में शुभ अवसर पर निवेश किया।
जिससे देशभर में अकेले सोने और चांदी का कारोबार ₹66,000 करोड़ से अधिक रहने का अनुमान है, जबकि मुंबई के बुलियन बाजारों में ₹6,500 करोड़ से अधिक का व्यापार दर्ज होने का अनुमान है। वैल्यू के हिसाब से पिछले साल के मुकाबले 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि इस बार खरीदारी का उत्साह केवल बड़े शॉपिंग मॉल और आधुनिक रिटेल प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रहा। देशभर के पारंपरिक बाजारों, ज्वेलरी बाजारों, बर्तन बाजारों, ऑटोमोबाइल शोरूम, इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट और स्थानीय दुकानों में ग्राहकों की भारी भीड़ और शानदार व्यापारिक गतिविधियां देखने को मिली हैं।
खंडेलवाल ने कहा कि धनतेरस की विशेषता यह है कि इसका आर्थिक प्रभाव केवल सोने-चांदी तक सीमित नहीं है. इस दिन तांबे, चांदी और स्टील के नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है. वहीं, पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार झाड़ू खरीदने को दरिद्रता और नकारात्मकता दूर करने तथा मां लक्ष्मी के आगमन का प्रतीक माना जाता है।
आधुनिक समय में धनतेरस मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, टेलीविजन, घरेलू उपकरणों, बिजली के सामान, ऑटोमोबाइल और अन्य आधुनिक उपभोक्ता वस्तुओं की खरीदारी का भी एक बड़ा अवसर बन गया है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर ने कहा कि इस वर्ष त्योहारी कारोबार में आई उल्लेखनीय तेजी के पीछे जीएसटी दरों में की गई महत्वपूर्ण कटौती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वदेशी अपनाओ’ के आह्वान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उपभोक्ताओं में भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी है, जिससे देश के घरेलू निर्माताओं, छोटे व्यापारियों, स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और एमएसएमई क्षेत्र को बड़ा लाभ मिला है।
ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल के अध्यक्ष राजेश रोकड़े ने कहा कि आज पूरे भारत में लगभग ₹60,000 करोड़ रुपये का स्वर्ण कारोबार हुआ है, ऐसा हमारा प्रारंभिक अनुमान है। पिछले साल की तुलना में यह कारोबार वैल्यू के लिहाज से लगभग 15 से 20 प्रतिशत अधिक रहने की संभावना है।
निश्चित रूप से यह ज्वेलरी उद्योग के लिए एक बहुत अच्छी शुरुआत है। इस बार धनतेरस पर सुबह 8 बजे से ही देशभर में ज्वेलर्स की दुकानें खुल गई थीं और ग्राहकों का अच्छा उत्साह देखने को मिला।
इस बार धनतेरस और दीपावली महीने की शुरुआत में होने का भी बाजार को फायदा मिला है।6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दीपावली है। इस समय तक अधिकांश लोगों की सैलरी आ चुकी है और बोनस भी मिल चुका है। इसलिए बाजार में अच्छा कैश फ्लो है और लोग उत्साह के साथ खरीदारी कर रहे हैं।
ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन ने सोने-चांदी का कारोबार 66,000 करोड़ रहने का अनुमान लगाया है। फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज अरोड़ा के अनुसार, कीमतों में भारी गिरावट के बाद पिछले कई दिनों से देशभर के आभूषण बाजारों में ग्राहकों की असाधारण भीड़ देखने को मिली है।
ग्राहकों का सोने-चांदी की खरीदारी के प्रति उत्साह बरकरार रहा। विशेष रूप से हल्के वजन के आभूषणों, पारंपरिक गहनों, चांदी के सिक्कों की खरीदारी को प्राथमिकता दी गई।