2010 में सिर्फ ₹8 था कीमत, अब 1.08 करोड़ के पार पहुंचा बिटकॉइन; एक साल में 57 लाख बढ़ा
Bitcoin Price: बिटकॉइन को डिजिटल दुनिया का सोना कहा जाता है। यह एक ऐसी डिजिटल करेंसी है जो बिना किसी बैंक या सरकार के कंट्रोल के काम करती है। ये डीसेंट्रलाइज है।
- Written By: मनोज आर्या
बिटकॉइन, ( प्रतीकात्मक तस्वीर)
Bitcoin Record All Time High: क्रिप्टोकरेंसी की दुनिया में सबसे चर्चित बिटकॉइन में लगातार बड़ी उछाल देखने को मिल रही है। अब बिटकॉइन की कीमत पहली बार 1.08 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है। आज गुरुवार, 14 अगस्त 2025 को बिटकॉइन ने ऑलटाइम हाई का रिकॉर्ड बनाया। साल 2009 में जब सतोशी नाकामोटो नाम के एक शख्स ने इस क्रिप्टोकरेंसी को बनाया था उस दौरान इसकी मूल्य लगभग शन्यू के करीब थी। यानी, अगर उस समय आप बिटकॉइन में एक रुपए से भी कम का निवेश करते तो आज उसकी कीमत ₹1 करोड़ से ज्यादा होती।
बिटकॉइन की पहली बड़ी कीमत बढ़ोतरी अक्टूबर 2010 में हुई थी। जब एक बिटकॉइन की कीमत लंबे समय तक 0.10 डॉलर (करीब ₹8) के करीब स्थिर रहने के बाद ऊपर जाने लगी। साल के अंत तक ये 0.30 डालर तक पहुंच गई। वहीं 2013 तक इसकी कीमत 1000 डॉलर के पार पहुंच गई थी। आज के हिसाब से रुपए में ये कीमत ₹87 हजार के करीब होती है।
डिजिटल दुनिया का सोना है बिटकॉइन
बता दें कि बिटकॉइन को डिजिटल दुनिया का सोना भी कहा जाता है। यह एक ऐसी डिजिटल करेंसी है जो बिना किसी बैंक या सरकार के कंट्रोल के काम करती है। यानी, ये डीसेंट्रलाइज है। किसी एक अथॉरिटी का इस पर कंट्रोल नहीं है। बिटकॉइन कोई फिजिकल कॉइन या नोट नहीं है, बल्कि एक डिजिटल कोड है जो आपके डिजिटल वॉलेट में रहता है। जैसे आप व्हाट्सएप पर मैसेज भेजते हैं, उसी तरह बिटकॉइन को आप इंटरनेट के जरिए दुनिया में कहीं भी भेज सकते हैं। इनकी संख्या भी सीमित है।
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कैसे काम करता है बिटकॉइन?
यह ब्लॉकचेन तकनीक पर काम करता है। कल्पना करें कि एक बहीखाता है, जिसमें दुनिया भर के बिटकॉइन लेनदेन लिखे जाते हैं। इस बहीखाते को ब्लॉकचेन कहते हैं और यह हजारों कंप्यूटरों पर एक साथ मौजूद होता है। ब्लॉकचेन एक डिजिटल कॉपी की तरह है जो जानकारी, जैसे लेनदेन, को रिकॉर्ड करती है। इसे हर कोई देख सकता है, लेकिन कोई बदल या मिटा नहीं सकता। यह कई कंप्यूटरों पर साझा होती है, इसलिए यह सुरक्षित और भरोसेमंद है।
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जब आप किसी को बिटकॉइन भेजते हैं, यह लेनदेन ब्लॉकचेन में दर्ज होता है। इसे जांचने और सुरक्षित करने का काम “माइनर्स” करते हैं, जो अपने कंप्यूटरों की ताकत से गणितीय समस्याएं हल करते हैं। बदले में, उन्हें नए बिटकॉइन मिलते हैं। यह सिस्टम इसलिए खास है, क्योंकि इसमें कोई एक संस्था सारा नियंत्रण नहीं रखती। बैंक में आपके पैसे का हिसाब बैंक रखता है और अगर बैंक गलती करता है या दिवालिया हो जाता है, तो आपका पैसा खतरे में पड़ सकता है। लेकिन बिटकॉइन में, ब्लॉकचेन हर लेनदेन को पारदर्शी और सुरक्षित रखता है।
