क्रेडिट कार्ड बिल भरने में लोगों का छूट रहा पसीना, 44% बढ़ा बकाया; देखें आंकड़े
Credit Card Overdues: देश के शहरी अबादी के लिए क्रेडिट कार्ड केवल पेमेंट का तरीका नहीं, बल्कि यह लाइफस्टाइल का हिस्सा है। लेकिन कार्ड स्वाइप करना जितना आसान है, बिल चुकाना उतना आसान नहीं।
- Written By: मनोज आर्या
(कॉनसेप्ट फोटो)
Credit Card Bill Due: भारत में क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके साथ ही समय पर क्रेडिट कार्ड का का बकाया बिल जमा नहीं करने वाले लोगों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। देश में 91 से 360 दिन तक का ड्यू क्रेडिट पेमेंट एक साल में 44.34 प्रतिशत बढ़ गया है। मार्च 2025 तक यह राशि 33,886.5 करोड़ रुपये हो गई, एक साल पहले यानी की मार्च 2024 में 23,475.6 करोड़ रुपये थी। इन आंकड़ों से साफ है कि एक साल में लभगग 10, 41.9 करोड़ रुपये बढ़ा है।
ऊपर दिए गए आंकड़ों में ये वो बकाया है, जो लोग तीन महीने से अधिक समय के बाद भी पेमेंट नहीं किए हैं। बैंकिंग सिस्टम की नियमों में इसे ‘नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स’ (NPA) कहा जाता है। क्रेडिट ब्यूरो सीआरआईएफ हाई मार्क की रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई है। यह संस्था रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के साथ रजिस्टर्ड है।
क्रेडिट कार्ड पर बढ़ रही लोगों की निर्भरता
इस ओवरड्यू सेगमेंट में बकाया राशि बढ़कर 29,983.6 करोड़ रुपये हो गई है, जो पिछले साल 20,872.6 करोड़ रुपये थी। यह राशि मार्च 2023 के लेवल से करीब डबल हो चुकी है। सीआरआईएफ का ये डेटा न केवल क्रेडिट कार्ड पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाते हैं, बल्कि समय पर पेमेंट न करने की समस्या को भी दिखाते हैं।
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‘पोर्टफोलियो एट रिस्क’ क्या होता है?
क्रेडिट ब्यूरो CRIF हाई मार्क की रिपोर्ट में एक और चिंताजनक आंकड़ा भी सामने आया है, जिसे पोर्टफोलियो एट रिस्क (PAR) कहा जाता है। क्रेडिट कार्ड पोर्टफोलियो एट रिस्क ये वो हिस्सा है जो इस बात की जानकारी तेदी है कि क्रेडिट कार्ड का कितना कर्ज रिस्क में है। मार्च 2025 में 91-180 दिन के बकाए में PAR 6.9 प्रतिशत से बढ़कर 8.2 प्रतिशत हो गया। इसती तरह 181-360 दिन के बकाए में झओई 0.91 प3तिशत से बढ़कर 1.1 प्रतिशत हो गया, जो 2023 में 0.7 प्रतिशत था। ये आंकड़े बताते हैं कि क्रेडिट कार्ड का कर्ज लंबे समय तक अनपेट रह रहा है।
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क्यों बढ़ रहा क्रेडिट कार्ड का बकाया?
देश के शहरी अबादी के लिए क्रेडिट कार्ड केवल एक पेमेंट का तरीका नहीं, बल्कि यह लाइफस्टाइल का एक हिस्सा बन गया है। लेकिन शॉपिंग के दौरान कार्ड स्वाइप करना जितना आसान है, बिल चुकाना उतना आसान नहीं। अगर टाइम पर अपना ड्यू नहीं चुकाते हैं तो सालाना आधार पर ब्याज दर 42 से 46 प्रतिशत तक हो सकती है। लोग अक्सर ऑफर्स और रिवॉर्ड्स के चक्कर में फंस जाते हैं। अगर समय पर पेमेंट नहीं करते या पूरा बिल नहीं भरते तो उस पर ब्याज काफी तेजी से बढ़ने लगता है।
