CNG Price : मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला, सीएनजी-पीएनजी गैस की कीमतों में आ सकता है उछाल
इन सेक्टरों से उत्पादित गैस सीएनजी, खाद के उत्पादन और बिजली के लिए प्रमुख कच्चा माल है। ऐसे में एपीएम गैस की कीमतें बढ़ने से सीएनजी की कीमतों में बढ़त देखने के लिए मिल सकती है।
- Written By: अपूर्वा नायक
सीएनजी के दाम
नई दिल्ली : मोदी सरकार ने देश की जनता के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में देशभर में सीएनजी और पीएनजी गैसों के दाम में उछाल देखने के लिए मिल सकता है। असल में सरकार ने एडमिनिस्टर्ड प्राइसिंग मैकेनिज्म यानी एपीएम के दायरे में आने वाले पुराने क्षेत्रों से प्रोड्यूस्ड होने वाली नेचुरल गैस के दामों में 4 प्रतिशत तक की बढ़ कर दी है।
इन सेक्टरों से उत्पादित गैस सीएनजी, खाद के उत्पादन और बिजली के लिए प्रमुख कच्चा माल है। ऐसे में एपीएम गैस की कीमतें बढ़ने से सीएनजी की कीमतों में बढ़त देखने के लिए मिल सकती है। आइए आपको बताते हैं कि सरकार की ओर से लिए गए इस फैसले का सीधा असर आम लोगों की जेब पर कितना बढ़ता हुआ दिखायी दे सकता है।
ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन
पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल यानी पीपीएसी के नोटिफिकेशन में ये कहा गया है कि एपीएम गैस का प्राइस 1 अप्रैल से 6.50 डॉलर प्रति यूनिट यानी एमएमबीटीयू से बढ़ाकर 6.75 डॉलर प्रति यूनिट कर दी गई है। एपीएम गैस सरकारी ऑयल कंपनियों ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन यानी ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड यानी ओआईएल के द्वारा उन क्षेत्रों से प्रोड्यूस्ड की जाती है, जो उन्हें नॉमिनेट किए जाते हैं। इन सेक्टर्स से प्रोड्यूस्ड गैस का इस्तेमाल कच्चे माल के तौर पर पाइप के माध्यम से रसोई गैस यानी पीएनजी के साथ-साथ गाड़ियां चलाने के लिए सीएनजी, फर्टिलाइजर और इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन के लिए किया जाता है। ये 2 साल में एपीएम गैस के प्राइस में पहली बढ़त है। ये सरकार की रूपरेखा के अनुसार है।
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ऐसे तय होती हैं कीमतें
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रैल, 2023 में डोमेस्टिक लेवल पर प्रोड्यूस्ड नेचुरल गैस के होलसेल प्राइस को कच्चे तेल के मंथली एवरेज इंपोर्टेड प्राइस के 10 प्रतिशत पर निर्धारित करने के लिए एक एक्सपर्ट कमिटी की रिपोर्ट को स्वीकार किया था। इसमें 4 डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट यानी एमएमबीटीयू का मिनिमम प्राइस और 6.5 डॉलर की मैक्सिमम लिमिट तय की गई है। सरकार ने इसके साथ साल 2027 में फुल रेग्यूलेशन तक 0.50 डॉलर प्रति यूनिट की सालाना बढ़त की सिफारिश में बदलाव किया गया है। साथ ही मंत्रिमंडल ने फैसला लिया है कि 2 साल तक दरों में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया जाने वाला है और उसके बाद सालाना 0.25 डॉलर की बढ़त की जाने वाली है। सोमवार को ऐलान होने वाले बढ़ोतरी उसी फैसले के अनुरूप है।
