भारत के एविएशन सेक्टर ने भरी ऊंची उड़ान, 5 सालों में हुआ 96,000 करोड़ का निवेश

नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने संसद में प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान एविएशन सेक्टर को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने ये भी जानकारी दी है कि पिछले 5 सालों में 96000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने संसद में प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान एविएशन सेक्टर को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने देश में मौजूदा समय में हेलीपोर्ट और वाटर एयरोड्रोम सहित 162 ऑपरेशनल एयरपोर्ट्स की जानकारी दी हैं।
नागरिक विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू (सौ. सोशल मीडिया)
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Indian Aviation Sector: सिविल एविएशन मिनिस्टर के राममोहन नायडू ने गुरुवार को संसद में एविएशन सेक्टर को लेकर अहम जानकारी शेयर की है। जिसमें उन्होंने कहा है कि AAI ने अपने पीपीपी वेंचर्स के साथ मिलकर पिछले 5 सालों में भारत के एविएशन सेक्टर में 96,000 करोड़ का इंवेस्टमेंट किया हैं।

लोकसभा में एक सवाल का लिखित में जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में मौजूदा समय में हेलीपोर्ट और वाटर एयरोड्रोम सहित 162 ऑपरेशनल एयरपोर्ट्स हैं। वर्ष 2024-25 के दौरान, भारतीय एयरपोर्ट्स पर कुल 41.2 करोड़ यात्रियों का आवागमन हुआ, जिसमें 7.7 करोड़ अंतरराष्ट्रीय और 33.5 करोड़ घरेलू यात्री शामिल हैं, इसमें सालाना आधार पर 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस अवधि के दौरान, शेड्यूल्ड भारतीय ऑपरेटरों ने 835 घरेलू और 251 अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर परिचालन किया।

क्या बोले सिविल एविएशन मिनिस्टर?

नायडू ने कहा कि साल 2016 में, सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने क्षेत्रीय हवाई संपर्क बढ़ाने, आम जनता के लिए एयर ट्रेवल को और ज्यादा किफायती बनाने और रिजनल डेवलपमेंट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम-उड़े देश का आम नागरिक यानी आरसीएस-उड़ान शुरू की थी।

योजना शुरु होने के बाद क्या अलग हुआ?

इस योजना के शुरू होने के बाद से, 637 आरसीएस मार्ग चालू हो चुके हैं, जो 92 अप्रयुक्त और कम उपयोग वाले एयरपोर्ट्स को जोड़ते हैं, जिनमें 15 हेलीपोर्ट और दो वाटर एयरोड्रोम शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा एयरपोर्ट्स पर इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं का आधुनिकीकरण और विस्तार एएआई या संबंधित एयरपोर्ट संचालकों द्वारा की जाने वाली एक सतत प्रक्रिया है, जो यातायात की मांग, वाणिज्यिक व्यवहार्यता, भूमि की उपलब्धता, विमान सुरक्षा के लिए परिचालन आवश्यकताओं और एयरलाइनों की मांग पर निर्भर करती है।

सरकार ने देश में न्यू ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट्स के विकास के लिए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट्स यानी जीएफए पॉलिसी, 2008 भी तैयार की है। उन्होंने बताया कि इस पॉलिसी के अनुसार, यदि राज्य सरकार सहित कोई भी एयरपोर्ट डेवलपर एयरपोर्ट विकसित करना चाहता है, तो उसे एक उपयुक्त स्थल की पहचान करनी होगी और एयरपोर्ट के निर्माण के लिए पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन करवाना होगा और केंद्र सरकार को प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र को ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नीति, 2008 के तहत महाराष्ट्र के पालघर या मध्य प्रदेश के पचमढ़ी या मटकुली में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण के लिए संबंधित राज्य सरकार या किसी भी एयरपोर्ट डेवलपर से एप्रूवल के लिए कोई प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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